Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर पूजा अर्चना से पहले जरुर पढ़े, मिलेगा फ़ायदा

हर महीने की 14 तारीख शिवरात्रि (Shivratri) होती है, लेकिन माघ महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि (Mahashivratri) कहा जाता है

हर महीने की 14 तारीख शिवरात्रि (Shivratri) होती है, लेकिन माघ महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि (Mahashivratri) कहा जाता है। इस दिन आदियोगी महाशिव की समस्त शक्तियां संपूर्ण ब्रह्मांड में आनंदमयी रूप में सक्रिय होती हैं। आम गृहस्थ से लेकर तत्वदर्शी इस दिन यथाशक्ति पशुपतिनाथ को प्रसन्न करने का यतन करते हैं। भारतीय यौगिक संस्कृति में बाबा औघड़दानी की आराधना करने के बहुत ही सरल विधान हैं। उन्हें कंदमूल फल और बेलपत्र जैसे मामूली से चीजों से प्रसन्न किया जा सकता है। भगवान शिव के कई आयाम हैं, इन्हीं आधारों पर उनकी आराधना के विधान निर्धारित होते हैं। गृहस्थ, योगी, कापालिक और अघोरी बाबा बैद्यनाथ की आराधना अपने अपने तरीकों से करते हैं। इनमें तामसिक और सात्विक दोनों ही प्रकार शामिल हैं। शाब्दिक आधार पर देखा जाए तो शिव (Shiv) का अर्थ होता है मंगलमय और कल्याणकारी। संपूर्ण ब्रह्मांड में एकमात्र शिव ही ऐसे देवता है जो मृत्यु को जीते हैं। जो नशे में भी स्थायित्व का निर्वाह करते हैं। मनुष्य के आराधक होने के साथ-साथ पशु पक्षी और प्रकृति भी उनकी आराधना करती है इसलिए उन्हें पशुपतिनाथ के नाम से भी जाना जाता है।

शिवरात्रि पर यूं प्रसन्न करें भोले बाबा को

शिवलिंग (Shivling) का बेलपत्र धतूरे सहित दुग्ध अभिषेक करें। ध्यान रखें कि दुग्ध अभिषेक के लिए सफेद गाय का कच्चा दूध ही इस्तेमाल किया जाए।

शिव सहस्रनाम का पाठ करें, और भगवान शिव को कंदमूल विशेषकर गाजर अर्पित करें

शिवलिंग को दुग्ध अभिषेक या जलाभिषेक कराने से पहले त्रिपुंड तिलक उन्हें अर्पित करें वैदिक विधान में शिव आराधना के दौरान त्रिपुंड अर्पण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

शिव आराधना के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, बाबा भोलेनाथ की पूजा सामग्री में कभी भी केतकी के फूलों और हल्दी का इस्तेमाल नहीं होता है। यह पूर्ण रूप से वर्जित होती है।

इस साल एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, इस दौरान शनि अपनी राशि मकर में रहेंगे और शुक्र ग्रह उच्च मीन राशि में रहेगा। साल 2020 से पहले यह ज्योतिषीय संयोग 1903 की महाशिवरात्रि में देखने को मिला था। ऐसे अद्भुत अवसर पर शिव की आराधना विशेष रुप से फलदायी होगी।

यदि आप सक्षम है तो शास्त्रोक्त विधि द्वारा आचार्यों से रुद्राभिषेक करवा सकते हैं। यह अमोघ आराधना है। इस दौरान शक्तिशाली रुद्र मंत्रों का जाप आपको वांछित मनोरथों की पूर्ति करेगा।

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