Hindenburg’s Report Impact: दिखने लगे है हिंडनबर्ग रिपोर्ट के साइड इफेक्ट, गर्दिश में घिरा अडानी ग्रुप

अडानी ग्रुप भले ही मानने को राजी न हो लेकिन हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg report) के साइड इफेक्ट अब साफ दिखने लगे हैं। ये है:

  • अडाणी इंटरप्राइजेज के एफपीओ को रद्द करने का ऐलान।

  • अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में लगातार गिरावट।

  • गौतम अडानी टॉप 15 अमीरों की लिस्ट से बाहर।

  • सेबी (SEBI) ने हिंडनबर्ग के आरोपों की जांच शुरू कर दी है।

  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI- Reserve Bank of India) ने सभी बैंकों से अडानी ग्रुप को दिये गये कर्ज का ब्यौरा मांगा है।

  • ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक क्रेडिट सुइस ने अडानी ग्रुप के बॉन्ड्स की वैल्यू घटाकर जीरो कर दी है।

ये सभी साइड इफेक्ट बताते हैं कि अडानी ग्रुप भले ही हिंडनबर्ग के खुलासे को बेबुनियादी बता रहा है, लेकिन अडानी ग्रुप पर बाजार का भरोसा टूट गया है। शुरूआत करते है ताजातरीन साइड इफैक्ट्स की, 1 फरवरी 2023 को जब संसद में बजट पेश किया जा रहा था और शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल रही थी। तभी अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी ने एक ऐसा ऐलान किया जिसने सभी को हैरान कर दिया।

अडानी ग्रुप ने अडानी एंटरप्राइजेज के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को वापस ले लिया है। अडानी ग्रुप (Adani Group) का ये FPO आज तक का सबसे बड़ा FPO था..जिसका फुल सब्स्क्राइब्ड हो गया यानि कि पूरी तरह एफपीओ बिक गया। इसी एफपीओ के जरिये अडानी इंटरप्राइजेज को 20 हजार करोड़ रुपये मिले थे। अडाणी ग्रुप ने निवेशकों के पैसे लौटाने का ऐलान किया।

जिस एफपीओ को अडानी ग्रुप ने 27 जनवरी को बड़ी धूमधाम से लॉन्च किया था और जिस एफपीओ को चार दिन में बेचा गया था, उसके बावजूद इन्हें रद्द कर दिया गया। अडानी इंटरप्राइजेज के एफपीओ की वापसी जितनी हैरानगी भरी बात थी, उसके साथ ये भी हैरानगी भरा रहा कि इसे ओवरसब्सक्राइब कैसे किया गया? हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? इसे भी समझिये

25 जनवरी को अडानी इंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) के एक शेयर की कीमत 3388.95 रुपये थी। अडानी एंटरप्राइजेज के एफपीओ का प्राइस बैंड 3,112 रुपये से 3,276 रुपये प्रति शेयर रखा गया था। जिस दिन यानि 27 जनवरी को एफपीओ लॉन्च हुआ था, उस दिन अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर गिरकर 2761.45 रुपये पर आ गया। यानि एफपीओ के प्राइस बैंड से करीब 350 रुपये कम। फिर 30 जनवरी को जब शेयर बाजार दोबारा खुला तो अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 2892.85 रुपये तक चढ़ गया। ये भी एफपीओ के प्राइस बैंड से कम था। और एफपीओ के आखिरी दिन यानी 31 जनवरी को अडानी एंटरप्राइजेज का ये शेयर 2973.90 रुपये हो गया। लेकिन तब भी ये एफपीओ के प्राइस बैंड से करीब 150 रुपये कम था।

तो यहाँ एक बात है जो फिट नहीं बैठती है। यानि जब अडानी इंटरप्राइजेज का शेयर रेट एफपीओ के प्राइस बैंड से कम था तो एफपीओ कैसे बिक गया? और आखिर कौन हैं वो निवेशक जिन्होंने एफपीओ को खरीदा? इस बारे में हम आपको हिंट पहले ही दे चुके हैं। जानकारों की मानें तो एफपीओ से हटने की एक वजह ये भी है।

गौतम अडानी ने खुद कहा है कि एफपीओ को वापस लेने का फैसला निवेशकों को नुकसान से बचाने के लिये लिया गया है, लेकिन क्या ये सच है या सच कुछ और है? क्योंकि इसी एफपीओ को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। इसका खुलासा फोर्ब्स (Forbes) ने किया है, जिन्होंने देअर्स एविडेंस दैट द अडानी ग्रुप लाइकली इनटू इनटू ओन $2.5 बिलियन शेयर सेल शीर्षक वाली रिपोर्ट में दावा किया है कि अडानी ग्रुप खुद पर्दे के पीछे से अपने एफपीओ खुद खरीदने में लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप की ओर से जिन कंपनियों के जरिये एफपीओ की खरीदारी की जा रही थी, उनमें इलारा कैपिटल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल (Elara Capital India Pvt Ltd and brokerage firm Monarch Networth Capital) शामिल हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में भी इन दोनों कंपनियों का जिक्र है।

हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के मुताबिक इलारा कैपिटल के इंडिया ऑपर्च्युनिटी फंड के पास अडानी की कंपनियों के $3 बिलियन के सार्वजनिक रूप से कारोबार वाले शेयर हैं। इनमें अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर भी शामिल हैं, जबकि मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल भारतीय ब्रोकरेज फर्म है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट का दावा है कि ये आंशिक रूप से साल 2016 से अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के मालिकाना हक़ में है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन दोनों कंपनियों ने अडानी ग्रुप के अकाउंटिंग फ्रॉड और स्टॉक मार्केट में हेरफेर (Accounting fraud and stock market manipulation) की सुविधा दी है। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों कंपनियां अडानी एंटरप्राइजेज के 2.5 बिलियन डॉलर के बिक्री प्रस्ताव में सक्रिय रूप से शामिल थीं, जिसका जिक्र अडानी एंटरप्राइजेज ने एफपीओ के बयान में भी किया है।

दोनों कंपनियां एफपीओ के बिक्री समझौते के दस अंडरराइटर्स में शामिल थीं। आसान शब्दों में अंडरराइटर्स या हामीदार वो कंपनियां होती हैं, जो कि एफपीओ में निवेश की गारंटी देती हैं और एफपीओ की बिक्री में भी अपनी भूमिका निभाती हैं। अडानी एंटरप्राइजेज के एफपीओ बयान के मुताबिक, ड्राफ्टिंग और अप्रूवल की जिम्मेदारियां इलारा कैपिटल को सौंपी गयी थीं, जबकि मोनार्क को गैर-संस्थागत निवेशकों के बीच एफपीओ की मार्केटिंग का काम सौंपा गया था। इसी बुनियाद पर फोर्ब्स ने आरोप लगाया है कि अडानी ग्रुप ने ही पर्दे के पीछे से एफपीओ को खरीदने का खेल खेला। हालांकि ये कहना मुश्किल है कि फोर्ब्स के खुलासों का अडानी ग्रुप के अपने एफपीओ को वापस लेने के फैसले से कोई लेना-देना है या नहीं।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के एक हफ्ते के भीतर अडानी ग्रुप के मूल्य में भारी गिरावट आयी है। अडाणी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयर भाव में लगातार बड़ी गिरावट देखी जा रही है। 24 जनवरी को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से अब तक अडानी ग्रुप की मार्केट कैपिटल 100 अरब डॉलर से ज्यादा घट चुका है। कभी दुनिया के नंबर 3 सबसे अमीर शख़्स गौतम अडानी (Gautam Adani) अब सबसे अमीर लोगों की रैंकिंग में सोलहवें पायदान पर पहुंच गये हैं। बीते एक हफ्ते में देश के सबसे अमीर गौतम अडानी की निजी संपत्ति 118.4 अरब डॉलर से करीब जो कि 44 फीसदी घटकर अब 64.6 अरब डॉलर रह गयी है।

अब इस मामले को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है, हालांकि मोदी सरकार (Modi government) ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर चुप्पी साध रखी है, लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिये हैं। बीते गुरूवार (2 जनवरी 2023) संसद में हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडानी ग्रुप पर लगे आरोपों की गूंज सुनाई दी, खूब हंगामा हुआ। विपक्ष ने अडानी ग्रुप पर लगे आरोपों की जांच की मांग की है। विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके चलते संसद की कार्यवाही पूरे दिन के लिये स्थगित करनी पड़ी। अडानी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर विपक्ष चाहता है कि संसदीय समिति का गठन किया जाये, जो कि इस मामले की गहन जांच पड़ताल करे।

सह-संस्थापक संपादक : राम अजोर

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