Democracy At Risk: खतरे में लोकतंत्र

लोकतन्त्र का उत्सव (Festival of democracy) मतदान मशीन से हो या बैलेट पेपर से, चुनाव में विश्वसनीयता और पारदर्शिता ही एक देश का मुस्तकबिल तय करते हैं!

हमारे देश में चुनाव प्रक्रिया कई तरह से प्रभावित की जाती है! लोकलुभावन वादे (Populist promises), फेक न्यूज़, स्तरहीन आरोप, दारू मुर्गा, कम्बल वगैरह तक का सहारा लिया जाता है! मतदान के दिन बूथ लेवल पर यह काम पार्टियों के एजेंट करते हैं!

पिछले साल लन्दन में बैठे सैयद सुजा (Syed Shuja) नामक आदमी ने भारत में EVM को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किये थे! उसने उन पहलुओं की चर्चा की थी जिससे मशीनों द्वारा मतदान प्रभावित करने की कोशिश की जाती है!

खैर…..

लगातार दो लोकसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद, लोकतंत्र को बचाने वाली यह किताब प्रकाशित हुई थी! इसकी प्रस्तावना लिखने वाले शख्स ने लिखा था-

“साठ के दशक से ही चुनाव सुधार मेरा सबसे पसंदीदा विषय रहा है! चुनाव आयोग के सामने जब चुनाव को प्रभावित करने वाले कारकों पर जब चर्चा हो तो EVM का मुद्दा जरूर उठाया जाय!”

EVM मशीन में VVPAT ट्रे लगाने की वकालत के साथ उस शख्स की प्रस्तावना समाप्त हो जाती है! उसने जिन देशों का उदाहरण दिया था, उन में से अधिकांश देशों ने कभी भी पूर्ण रूप से EVM का उपयोग नहीं किया!

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव भी बैलेट पेपर से ही कराये गये!

इस किताब के अगले पन्नों में एक दूसरा शख्स अपना सन्देश लिखता है! वह भारत सरकार के पूर्व सचिव ओमेश सैगल का हवाला देते हुए कहता-

“मनचाहे परिणाम के लिए EVM में छेड़छाड़ संभव है!”

तीसरी भूमिका बांधी है स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर साहब ने! उन्होंने लिखा- मैंने मतदान की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया पर सन 2003 में ही एक किताब लिख मारी थी, जिसे कई कंप्यूटर वैज्ञानिकों द्वारा सराहा गया! मशीन द्वारा मतदान त्रुटिपूर्ण तो है ही, इसमें छेड़छाड़ भी संभव है!

फ्लॉपी, CD और डेढ़ GB की पेन ड्राइव वाले उस युग में इन महान हस्तियों ने एक किताब छापकर ये बताया था कि EVM की मदद चुनाव कराने का मतलब है- लोकतंत्र को खतरे में डालना!

.…..और यही किताब का शीर्षक भी है!

फ़िलहाल 2020 चल रहा है! फ्लॉपी, CD और डेढ़ GB की पेन ड्राइव कब की पीछे छूट गयी है! सूचना क्रांति अलेक्सा और गूगल होम तक पहुँच चुकी है!

हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ एक तोते ने अपने मालिक की गैरहाजिरी में voice over तकनीक का प्रयोग कर के न सिर्फ गाने सुने बल्कि ऑनलाइन सामान तक मंगाने की कोशिश कर ली थी!

यदि लोकतंत्र तब खतरे में था तो आज उसकी क्या हालत है.….देखना ये है! राजनीति अब पैसे कमाने का जरिया बनकर रह गयी है! लोकतंत्र के जिस मंदिर के 88% पुजारी करोड़पति हों, वहां सिर्फ और सिर्फ तंत्र हो सकता है…….लोक नहीं! चुनाव चाहे कागज से करवाए जाएँ या मशीन से, चुनाव इन्ही लुटेरों का होना है!

आज EVM पर सवाल उठाने वालों को कोसा जा रहा है!

…तो कोसने वाले लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि उस चर्चित किताब के लेखक हैं- GVL नरसिम्हा राव (राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद, बीजेपी)

प्रस्तावना लिखी है लालकृष्ण आडवाणी जी (वरिष्ठ सदस्य, मार्गदर्शक मंडल बीजेपी) ने!

पहला सन्देश लिखा है- आंध्रप्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू जी (NDA के पूर्व सहयोगी) ने!

…और दूसरा सन्देश लिखा है- Pro. David L Dill, (Stanford यूनिवर्सिटी) ने!

साभार- कपिल देव

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