गृहयुद्ध की संभावनाओं से जूझ रहा Pakistan खालिस्तान के लिए करना चाहता है ये बड़ा काम

मुल्ला, ऑर्मी और दहशतगर्द तंजीमों के भरोसे चलने वाला पाकिस्तान (Pakistan) भले ही खुद को इस्लामिक रिपब्लिक करता

न्यूज़ डेस्क (समरजीत अधिकारी): मुल्ला, ऑर्मी और दहशतगर्द तंजीमों के भरोसे चलने वाला पाकिस्तान (Pakistan) भले ही खुद को इस्लामिक रिपब्लिक करता हो, लेकिन पाकिस्तान के अंदरूनी हालात ऐसे है कि वहाँ कभी भी गृहयुद्ध छिड़ सकता है। इस्लामाबाद के आर्थिक, सामाजिक और सियासी तानेबाने से वहाँ की आव़ाम खासा परेशान है। घर सुधारने की कोशिशें छोड़कर पाकिस्तान खालिस्तान के लिए कनाडा में जनमत संग्रह की कवायदों (Pakistan is engaged in referendum exercise for Khalistan) में लगा है जबकि पाकिस्तान में आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा के बैनर तले लोगों का भारी हुजूम शियाओं के विरोध में सड़कों पर उतरा हुआ है। जिसे रोकने में पुलिस और प्रशासन दोनों ही नाकाम दिख रहे है। सिपाह-ए-सहाबा शियाओं की हत्या करने के लिए कुख्यात है।

शिया विरोधी प्रदर्शन के कारण पाकिस्तान में #Shia Genocide ट्रैंड कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर, तख्तियां और पैम्फ्लैट ले रखे है जिन पर ‘शिया काफ़िर है’ लिखा हुआ है। सोशल मीडिया पर मीम्स, वीडियोज़ और प्रदर्शन की तस्वीरें धड़ाधड़ साझा की जा रही है जिसकी वज़ह से हालात और भी नाज़ुक मोड़ पर पहुँचते दिख रहे है। हाल में पाकिस्तान के कुछ प्रमुख शिया धर्मगुरूओं ने मुहर्रम पर आशूरा जुलूस के मौके पर इस्लाम विरोध बयान (Some Pakistani Shia religious leaders gave anti-Islam statements on the occasion of Ashura procession on Muharram) जारी किये थे। जिसके बाद शियाओं पर हमले की वारदात में भारी इज़ाफा देखा गया। ज़वाब में कराची की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन हो रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा काफी संगीन अपराध (Blasphemous is Serious crime in Pakistan) माना जाता है। फिलहाल हालात काबू से बाहर हो रहे है, जिसके चलते गृहयुद्ध की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। इन हालातों के बावजूद पाकिस्तानी हुक्मरान अपना ध्यान कनाडा की ओर लगाये बैठे है ताकि खालिस्तानी आंतकी गतिविधियों (Khalistani terrorist activities) को लगातार हवा दी जा सके।

इस्लामाबाद में बैठे नीति-नियन्ताओं का पूरा ध्यान कनाडा में खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह कराने की ओर लगा हुआ है। जिसका खुलासा मैकडोनाल्ड लौरियर इंस्टीट्यूट (Macdonald Laurier Institute) की रिपोर्ट में किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान जनमत संग्रह कराने की कोशिशों के साथ कनाडा में रह रहे खालिस्तान समर्थकों का वित्त पोषण (Pakistan funding For Khalistan supporters) करते हुए आंतकियों की नई नस्ल भी तैयार कर रहा है। कनाडा में खालिस्तानियों के बीच पाकिस्तान का दखल लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे कनाडा और भारत की सुरक्षा को लेकर नये खतरे पैदा होने की पूरी संभावना बनी हुई है।

इस साल नंवबर तक खालिस्तान के समर्थक सिखों के बीच जनमत संग्रह कराने की पूरी तैयारी ISI के देखरेख में की जा रही है। कनाडा सरकार का गृह विभाग ऐसी किसी भी कवायद को समर्थन ना देने का आश्वासन पहले ही दे चुका है। गृह विभाग पाक प्रायोजित खालिस्तान समर्थकों को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा (Pakistan-sponsored Khalistan supporters pose major threat to Canada’s national security) मानता है। मौजूदा हालातों में पाकिस्तान को अपने घरेलू हालात संभालने पर ध्यान देना चाहिए ताकि वहां स्थिरता का माहौल बन सके बावजूद इसके वो खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह कराने की कोशिशों में लगा हुआ है।

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