Indo-China Border Conflict: चीन को कड़ा संदेश देने के लिए, वायुसेना ने दागी 10 आकाश मिसाइलें

न्यूज डेस्क (विश्वरूप प्रियदर्शी): वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे भारत-चीन सीमा तनाव (Indo-China Border Conflict) के बीच बीजिंग के हुक्मरानों और पीएलए को कड़ा संदेश देने के लिए भारतीय वायु सेना ने अपने शस्त्रागार के भरोसेमंद हथियार आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की दस मिसाइलों को दागकर उनका परीक्षण किया। स्वदेशी तकनीक से निर्मित इस एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से भारतीय वायुसेना सशस्त्र संघर्ष के हालातों में वायुसीमा की रक्षा दुश्मनों की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से कर सकती है।

आकाश मिसाइलों की परीक्षण आंध्र प्रदेश की सूर्यलंका टेस्टिंग रेंज (Suryalanka Testing Range of Andhra Pradesh) में पिछले हफ़्ते के दौरान किया गया। इस दौरान आकाश ने निर्धारित लक्ष्य को सीधा भेदकर अपनी काबिलियत एक बार फिर साबित की। परीक्षण लगभग पूरी तरह कामयाब रहा। संयुक्त गाइडेड हथियारों के अभ्यास सत्र 2020 में आकाश के पऱीक्षण के मुख्य उद्देश्य अलग-अलग जंगी हालातों में इसकी मारक क्षमता का पता लगाना था। इस अभ्यास सत्र के दौरान कंधा दागी जा सकेगी वाली 9K38 Igla मिसाइल का भी परीक्षण किया गया। दिलचस्प है कि इन दोनों शस्त्र प्रणालियों की तैनाती पूर्वी लद्दाख के मोर्चे पर पहले ही की जा चुकी है।

इन हथियारों की मदद से भारतीय वायु क्षेत्र को दुश्मनों के हवाले बचाने में बड़ी मदद मिलेगी। साथ ये दुश्मनों के हमले को नाकाम करने के साथ, उनके फाइटर एयरक्राफ्ट को खदेड़ने के लिए भी दबाव बनाने में कारगर है। आकाश स्वदेशी तकनीक से विकसित है। साथ ही ये रक्षा बलों में स्वदेशी हथियारों से जंग लड़ने की उम्मीद भी पूरी करता है। आकाश के इस संस्करण को नयी तकनीक से अपग्रेड किया गया है। पहले के मुकाबले इसको लाने- ले जाने में और तैनाती में काफी हुई है।

लक्ष्य को करीब से भेदने के साथ ही रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) आकाश प्राइम मिसाइल प्रणाली पर काम कर रहा है। जिसकी मदद से बेहद ऊंचाई वाले लक्ष्यों को भेदने की काबिलियत भी हासिल हो सकेगी। जिस तरह से चीन ने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान जे -20 को विकसित उसकी तैनाती की, उसी तर्ज पर दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष के बीच डीआरडीओ अपनी तैयारी जारी रखना चाहता है।

मिसाइल प्रणाली का दूसरे सिस्टम्स के साथ इंटीग्रेशन किया गया है। जिससे इसी स्टील्थ क्षमता में काफी इज़ाफा हुआ है। ये दुश्मन के उन लड़ाकू विमानों को भी चकमा दे सकती है, जो कि एंटी रेडिएशन मिसाइल (Anti radiation missile) से लैस है। सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने हाल ही में वायु सेना के लिए 5,500 करोड़ रुपये की लागत वाले मिसाइल सिस्टम्स के सात स्क्वाड्रन को मंजूरी दी है।

वायुसेना इन मिसाइल प्रणालियों को पाकिस्तान और चीन के साथ लगी सीमाओं पर तैनात करेगा ताकि दुश्मन के विमानों, ड्रोन और निगरानी विमानों के खिलाफ कड़ी निगरानी रखी जा सके। आकाश मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली है। जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित किया गया है। इसका संयुक्त उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है।

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