प्रौद्योगिकी राष्ट्रवाद के कारण Taiwan के सामने हाथ फैलाने को मजबूर चीन

न्यूज़ डेस्क (शौर्य यादव): ताइवान (Taiwan) से बढ़ते तनाव के बीच बीजिंग ने ताइपे से कंप्यूटर चिप्स और सेमीकंडक्टर्स के आयात में इज़ाफा कर दिया है। VOA की एक रिपोर्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई से सितम्बर महीने के दौरान ताइवानी प्रौद्योगिकी कंपनियों को चीन की ओर से मिलने वाली ऑर्डर में 6 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गयी। इस मसले पर विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार प्रौद्योगिकी व्यवसाय का विस्तार कर रहा है। जिसके नतीजन उसने ताइवान से आयात बढ़ाया। फ्रांसीसी निवेश बैंक नैटिक्सिस (French investment bank Natrixis) में एशिया-प्रशांत के प्रमुख अर्थशास्त्री एलिसिया गार्सिया हेरेरो के मुताबिक- चीनी हुक्मरान ये बात अच्छे से जानते है कि, वे 5 जी नेटवर्क के लिए जरूरी उच्चतम गुणवत्ता के सेमीकंडक्टर्स का उत्पादन करने में काबिल नहीं है। वहीं दूसरी ओर ताइवान आला दर्जे के सेमीकंडक्टर्स बनाता है। सेमीकंडक्टर्स निर्माण और  डिजाइनिंग में ताइपे अग्रणी है।

ताइवानी कारखाने दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले बेहतरीन कंप्यूटर चिप्स के उत्पादन का केन्द्र है। पिछले चार सालों के दौरान ताइवान की कंपनियों ने चीनी बाजार पर दूसरों देशों की निर्भरता को कम करने का काम किया। साथ ही बीजिंग और ताइपे बीते 70 सालों से सियासी झगड़े में भी उलझे हुए है। चीन ताइवान को अपना पृथक प्रांत के अन्तर्गत मानता है। गाहे-बगाहे बीजिंग के नीति-नियन्ता ये भी दावा करते आये है कि, अगर उन्हें इस दावें के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करना पड़े तो, वो इससे कतई गुरेज नहीं करेगें। चीन, ताइवान में आजादी के सुर फूंकने के लिए वाशिंगटन को अक्सर कटघरे में खड़ा करता रहा है। चीन नवीनतम दूरसंचार प्रौद्योगिकी 5-जी विकसित करना चाहता है। जिसके पीछे उसकी मंशा दुनिया भर में प्रौद्योगिकी क्षेत्र में शक्तिशाली ताकत बनने की है। जिसे प्रौद्योगिकी राष्ट्रवाद (Technology Nationalism) के रूप में देखा जा रहा है।

चीन को प्रौद्योगिकी उपकरण निर्यात करने के मामले में ताइवान पहले पायदान पर काबिज़ है। ताइपे सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से जुड़े उत्पादों का निर्माण करके तकरीबन उसका आधा हिस्सा निर्यात करता है। ताइवान के ब्यूरो ऑफ फॉरेन ट्रेड के आंकड़ों के मुताबिक इसी साल जुलाई और सितंबर महीनों के बीच ताइवान ने कुल 90 बिलियन डॉलर का का वैश्विक निर्यात किया। जिसमें से 27.2 बिलियन डॉलर का निर्यात सीधे बीजिंग को किया गया। सेमीकंडक्टर्स और उससे जुड़े उत्पादों का तकरीबन 32.9 बिलियन अमरीकी डालर का निर्यात ताइपे ने चीनी आयातकों को किया। जिन्होनें सेमीकंडक्टर्स और उससे जुड़े कुल ताइवानी उत्पादों एक-तिहाई हिस्सा खरीदा। ताइपे के लिए काम करने वाली ब्रैडी वांग मार्केट इंटेलिजेंस बिजनेस काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक ताइवान बहुत सा सामान चीन को बेच रहा है। क्योंकि चीन असल में स्टॉकिंग इन्वेंट्री है।

वांग के मुताबिक इसके पीछे अहम वजह चीन और अमेरिका के बीच बदलते हालाती तालुक्कात है। दोनों मुल्कों को दरम्यां तीन से साल से ज्यादा व्यापारिक विवाद भी बड़ी वज़ह है। वाशिंगटन Huawei को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बड़ा मानता है। स्टॉकपिलिंग की वज़ह चीनी-अमेरिकी संबंधों के हालिया हालात है – सिर्फ हुआवेई नहीं। चीन अपने सूचना एवं प्रौद्योगिकी व्यवसाय को पारंपरिक तौर पर कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली के तर्ज पर विकसित करना चाहता है। जिसके लिए वो नवीनतम प्रौद्योगिकी विकसित करने की दौड़ में आगे रहने की कोशिश लगातार करता रहता है।

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