Vishwakarma Pujan 2020: विश्वकर्मा पूजा की संपूर्ण विधि, महात्मय, और मुहूर्त

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न्यूज़ डेस्क (यर्थाथ गोस्वामी): प्रत्येक वर्ष की भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को देवताओं के आर्किटेक्ट, इंजीनियर, और इंटीरियर डिजायनर भगवान विश्वकर्मा (Lord Vishwakarma) का जन्मदिवस होता है। स्थापित सनातन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा पूजन के बगैर कोई भी तकनीकी और निर्माण कार्य शुभ और फलीभूत नहीं होता। इसलिए घर, दुकान, कंन्सट्रक्शन साइट्स, डॉक यॉर्ड (Construction sites, dock yard) अन्य किसी भी जगह टैक्निकल काम शुरू करने से पहले इनका पूजन किया जाता है। कहा जाता है कि सृष्टि के निर्माण में भगवान विश्वकर्मा ने ही ब्रह्मा जी की सहायता की थी। भगवान विश्वकर्मा को स्थापत्य कला के जनक और वास्तुदेव के पुत्र (Father of Architecture and son of Vastu Dev) के रूप में भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में गोवर्धन पूजा वाले दिन भी विश्वकर्मा पूजन के विधान है।

विश्वकर्मा पूजन का शुभ मुहूर्त 2020

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ – 15 सितंबर, मंगलवार – रात – 11:01 से
चतुर्दशी तिथि की समाप्ति – 16 सितंबर, बुधवार – सांय – 07:56 तक
पूजा का शुभ मुहूर्त – 16 सितंबर, बुधवार – प्रात: 10 बजकर 09 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक

अमृत काल मुहूर्त – प्रात: 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक    

विजय योग बेला- अपराह्न 02 बजकर 19 मिनट से मध्याह्न 3 बजकर 08 मिनट तक 

गोधूलि बेला मुहूर्त- सांय 06 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 36 मिनट तक 

पूजन के नियम

  • विश्वकर्मा पूजा के दिन कारोबारियों को अपने कारखाने और फैक्ट्रियां में काम बंद रखना चाहिए। कारखाने और फैक्ट्रियां कल-पूर्जों और औजारों को समेटकर उनकी साफ-सफाई और आयलिंग-ग्रीसिंग करनी चाहिए। इस दिन औजारों, कल-पुर्जों, मशीनों और तकनीकी उपकरणों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।
  • औजारों, कल-पुर्जों, मशीनों और तकनीकी उपकरणों को पूरी तरह आराम देने के साथ ही, इस दिन मांस-मदिरा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए साथ ही, जातक को अपना कारोबार और रोजगार बढ़ाने के लिए इस दिन जरूरतमंदों और असहाय लोगों को दान-दक्षिणा देनी चाहिए।
  • औजारों, कल-पुर्जों, मशीनों और तकनीकी उपकरणों भगवान विश्वकर्मा का प्रतिरूप है। इस कारणवश इन दिन इनका रखरखाव और साफसफाई भगवान का स्वरूप मनाकर करें।

पूजन का विधान

भगवान विश्वकर्मा का पूजन करने के लिए प्रात: स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत होकर पूजा का संकल्प ले। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या छवि के समक्ष अक्षत, हल्दी, फूल, पान का पत्ता, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, धूप, दीप और रक्षासूत्र अर्पित करें। जिन औजारों, कल-पुर्जों, मशीनों और तकनीकी उपकरणों की पूजा आप करना चाहते है उन्हें अच्छे से साफ कर उनकी ऑयलिंग-ग्रीसिंग कर पूजा चौकी के पास रखे लें। उन्हें अक्षत् और हल्दी लगाये। धूप-दीप, गंध और ताम्बुल अर्पित करें। पूजा चौकी के पास आटे की रंगोली बनाये उनमें सात प्रकार के अन्नों रखें। रंगोली के ठीक बीच में तांबे की लोटे में पानी भरकर रखें। समर्थ अर्चकों की उपस्थिति में उनसे भगवान विष्णु और भगवान विश्वकर्मा की आरती करवाये। रंगोली में रखे ताम्र कलश पर हल्दी चढ़ायें और मौली बांधे। इसके बाद इन मंत्रों ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:, ॐ अनन्तम नम:, ॐ पृथिव्यै नम: का जाप करें। पूजा के उपरान्त भोग लगे प्रसाद को भंडारे में मिलाकर लोगों में बांट दे।  

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