Vikas Dubey Encounter Updates: विकास से जुड़े इन सवालों का ज़वाब किसी के पास नहीं

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न्यूज़ डेस्क (विश्वरूप प्रियदर्शी): जिस तरह से गैंगस्टर विकास दुबे (Gangster Vikas Dubey) को यूपी पुलिस ने ढेर किया है। उससे कई बड़े सवाल उभर रहे है। फिलहाल उनका ज़वाब ना तो उत्तर प्रदेश पुलिस दे रही है, और ना ही प्रशासन। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव (Samajwadi Party supremo Akhilesh Yadav) और कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा (Uttar Pradesh in-charge Priyanka Gandhi Vadra) ने काफी जोर शोर से इस मामले पर अपनी आवाज़ बुलन्द की है। सबसे बड़ा और अहम सवाल कानपुर में एसटीएफ ने दावा किया कि, विकास हथियार छीनकार भागने की फिराक में था। चेतावनी देने के बाद उसे मार गिराया गया। जबकि असलियत ये है कि, जहाँ गाड़ी पलटी वहाँ से 7-8 किलोमीटर दूर विकास को ढ़ेर किया गया। बारिश और फिसलन के माहौल में भारी शरीर वाला विकास इतनी जल्दी इतनी दूर भागने में कैसे कामयाब हुआ?

वारदात के बाद हाई अलर्ट के बीच सड़क के रास्ते वो हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश कैसे घूमता रहा? उत्तर प्रदेश पुलिस अभी तक ये भी साफ नहीं कर पायी है कि, उसे उज्जैन से गिरफ्तार किया गया है या उसने खुद सरेंडर किया है? अगर उसने सरेंडर किया था तो, एकाएक उसे पुलिसिया कस्टडी (Police custody) से भागने की जरूरत क्यों पड़ गयी? पुलिस महकमे पर बड़ा सवाल ये भी है कि, उसने कई अपराधिक गतिविधियों (Criminal activities) को अन्ज़ाम दिया। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस सोती रही। जिससे विकास के हौंसले बढ़ते रहे। क्या यूपी पुलिस का खुफ़िया तन्त्र इतना कमजोर था कि, विकास की कारगुज़रिया उन तक नहीं पहुँचती थी?

विकास अपने इलाके में समानान्तर अदालत (Parallel court) लगाता था। भूमि पर ज़बरन कब़्जा करना, रंगदारी वसूलना, अवैध हथियार इकट्ठे करना लंबे समय तक पुलिस इन बातों से अन्ज़ान क्यों बनी रही? क्या विकास को कुछ लोगों का राजनीतिक संरक्षण (Political patronage) हासिल था, जिसके चलते पुलिस उसके गिरेबां में हाथ डालने के डरती थी? कयास ये भी लगाये जा रहे है कि, विकास के गिरफ्त में होने के बावजूद कई सफेदपोश लोगों ने अपनी छवि धूमिल होने के बचाने के लिए जानबूझकर विकास का एनकाउन्टर करवाया। ताकि विकास से उनके संबंधों का खुलासा ना हो पाये।

ऐसी कौन सी राजनीतिक ताकत (Political power) विकास का साथ दे रही थी कि उसने जेल में रहते हुए उसने शिवराजपुर नगर पंचायत का चुनाव (Election of Shivrajpur Nagar Panchayat) जितवा लिया? उन लोगों के नामों का खुलासा पुलिस अभी क्यों नहीं कर पा रही है, जिन लोगों ने विकास को उज्जैन में छोड़ा। विकास के पकड़े जाने से ठीक एक दिन पहले महाकाल पुलिस थाने में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों का तबादला किसके इशारे पर किया गया? विकास के पकड़े जाने से बाद जब कांग्रेस ने विकास का कनेक्शन मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Home Minister of Madhya Pradesh Narottam Mishra) से जोड़ा तो, ठीक अगले दिन विकास का पुलिसिया कार्रवाई में मार गिराया जाना बड़े सवाल तो खड़े करता ही है।

भले ही विकास एनकाउन्टर में मार गिराया गया हो, लेकिन कई सफेदपोश लोगों (White collar people) की असलियत अभी सामने आनी बाकी है। सबसे अहम बात तो ये कि जो सवाल उठाये गये है। वो सवाल ही बने रहेगें या फिर उनका ज़वाब मिलेगा?

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