चीनी और अमेरिकी तल्ख़ियों के बीच third world war की आहट

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नई दिल्ली (शौर्य यादव): कोरोना वायरस (Coronavirus) के बाद वैश्विक हालात नाजुक मोड़ की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में बैठक के दौरान वायरस इन्फेक्शन (virus infaction) के लिए वाशिंगटन (Washington) और बीजिंग (Beijing) के बीच छींटाकशी दर्ज की गई। मौजूदा हालातों के लिए दोनों एक दूसरे को दोषी मान रहे हैं। इस बीच दक्षिणी चीन सागर (South China Sea) में अमेरिकी जंगी बेड़े की मौजूदगी ने एक बार फिर दोनों देशों आमने सामने ला खड़ा किया है।

विवादित इलाका स्कारबोलो शोअल (Scarborough Shoal) फिलहाल चीनी सरकार के नियंत्रण में है। इसके साथ ही इस इलाके पर पांच और देश भी दावा करते रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी एम्फीबियस एसॉल्ट शिप (American amphibious assault ship) और बंकर हिल गाइडेड मिसाइल क्रूजर मलेशियाई अधिकार वाले जल क्षेत्र में दाखिल हुए। इस दौरान वहां चीन की सरकारी कंपनी का मलेशिया स्टेट ऑयल कंपनी के साथ मिलकर तेल खनन के काम में लगे हुए थे। विवादित जल क्षेत्र में चीनी और ऑस्ट्रेलियाई जंगी जहाजों का दबदबा अक्सर बना रहता है।

कोरोना वायरस इंफेक्शन के नाजुक दौर से गुजरने के बावजूद चीन ने विवादित इलाके में अपनी गतिविधियां बदस्तूर जारी रखी। रणनीतिक दृष्टि से इलाका काफी अहम है, दुनिया भर का दो-तिहाई जल परिवहन इसी मार्ग से संचालित होता है। चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार इलाके में बनी हुई है। मामले पर बीजिंग ने कहा- अमेरिकी नौसेना इलाके में अस्थिरता पैदा कर रही है। ये अमेरिकियों का पुराना नैरेटिव है।

यूनाइटेड स्टेट इंडो पैसिफिक कमांड ने इलाके में अपनी मौजूदगी को आधिकारिक रूप से माना, लेकिन स्ट्रैटेजिक ऑपरेशनल कारणों से जंगी बेड़ों की लोकेशन साझा करने से इंकार कर दिया। इलाके में प्रभुत्व को लेकर चीन के सामने जापान, वियतनाम, ब्रुनेई, मलेशिया और फिलीपींस अपना दावा पेश कर चुके हैं। सीधे तौर पर विवादित इलाके से अमेरिकी हितों का जुड़ाव नहीं है।

गौरतलब है कि, चीनी कम्युनिस्ट सरकार की प्रभुत्ववादी नीतियों के कारण विवादित दक्षिण चीन सागर में कई कृत्रिम द्वीपों का निर्माण किया गया है। जहां शोध कार्य करने की आड़ में चीन ने मिलिट्री नेवल बेस बनाया है। ऐसे में अमेरिकी जंगी बेड़ों का उस इलाके में जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है।

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