तो इसलिए है Swiss Bank Mafia की पहली पसन्द

ज़्यादातर Millionaire क्यों रखते हैं Swiss Bank Account में अपना पैसा ? स्विस बैकिंग व्यवस्था ग्राहकों की सहूलियत का खास़ ध्यान रखती है।

नई दिल्ली (अक्षय कुमार): दुनिया भर में स्विस बैंक (Swiss Bank) काला धन (Black Money) और बेनामी सम्पत्ति सहेजने के लिए मशहूर है क्योंकि स्विट्जरलैंड की बैकिंग व्यवस्था ग्राहकों की सहूलियत का खास़ ध्यान रखते हुए काफी सरल है। ऐसे लोगों के लिए स्विस बैकिंग प्रणाली और भी बेहतरीन है जो अपना पैसा वित्तीय क्षेत्रों में निवेश नहीं करना चाहते हैं। इतिहास में भी देखा गया है कि कई पॉलिटिकल पार्टियां (political parties) , एक दूसरे पर घोटाले का पैसा स्विस बैंक में रखने का इल्ज़ाम लगाती रही हैं। ये सब सुनकर लोगों के ज़हन में ज़्यादातर सवाल उठता है कि आखिर स्विस बैंक में ऐसा क्या है जो भारतीय बैंक्स में नहीं ? जिसकी वज़ह से करोड़पति कारोबारी, भष्ट्राचारी राजनेता, ड्रग माफिया और दहशतगर्द तंज़ीमें स्विस बैंक में पैसा रखना पसंद करते हैं।

क्या स्विस बैंक में पैसा रखना गैर-क़ानूनी है ?

ये पूछना ठीक वैसा ही है, जैसे मानों कि HDFC और SBI में पैसे रखना गैर-क़ानूनी हो। चाहे स्विस बैंक हो या कोई और बैंक, किसी भी बैंक में पैसा रखना गैर-क़ानूनी नहीं होता बल्कि स्विस बैंक अपने देश के कानून के मुताबिक अपने ग्राहकों की जानकारी सुरक्षित रखता है। ये अपने कानून के अनुसार खाताधारक को एक बार में अधिक पैसे निकालने की इजाज़त भी देता है।

इसके बाद आपके ज़हन में सवाल आएगा कि, स्विस बैंक कैसे गैर-क़ानूनी सम्पति रखने का अड्डा बन गया ?

मोतीलाल ओसवाल में बड़े निवेशक आशीष शंकर के मुताबिक- इटली की मौजूदा बैकिंग व्यवस्था स्विट्जरलैंड से प्रेरित है। आज स्विस बैंक आधुनिक बैकिंग का चेहरा बना हुआ है। साल 1841 के दौरान स्विस बैकिंग व्यवस्था की नींव पड़ी। आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए बैकिंग प्रणाली NUMBERED ACCOUNT को खुफ़िया खाते में तब्दील कर देती है। सरसरी तौर पर स्विस बैंकों की प्रणाली दूसरे परम्परागत बैकों के तर्ज पर ही चलती है। शुरूआती दौर में अमेरिकी रईस और यूरोप के लोगों का कालाधन स्विस बैकों में रखा जाता था। पराम्परागत तरीकों से आगे बढ़ते हुए इन बैकों को आधुनिक तकनीकी प्रक्रिया के साथ कानूनी पक्ष मज़बूत करने की ज़रूरतों पर भी ध्यान देना पड़ा लेकिन स्विट्जरलैंड के यूरोपियन संघ में शामिल होने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लग गई। जब दुनिया दो विश्व युद्धों की त्रासदी झेल चुकी थी। तब स्विट्जरलैंड की बैकिंग व्यवस्था को काफी तेज़ी से रफ्तार मिली। स्विट्जरलैंड के ज़्यादातर हिस्से युद्ध के नुकसान से अछूते रहे। ऐसे में विरासत के साथ स्विस दुनिया का सबसे भरोसेमंद बैंकर बन गया। धुरी (Axis) और मित्र राष्ट्र (Allied) दोनों के ही सदस्य तानाशाह और कारोबारियों ने स्विस बैकों की विश्वसनीयता को देखते हुए उनमें धन जमा करवाना शुरू कर दिया। जिससे बड़ी तादाद स्विट्जरलैंड के पहाड़ी इलाकों में बड़े खुफ़िया वॉल्ट तेज़ी से बनने लगे। स्विस बैकों के खाताधारक अपने पैसों की गोपनीयता कायम रखने के लिए खास़ तकनीक अपनाने लगे। खाताधारक की पूरी जानकारी बैंक के कुछ खास़ कर्मचारियों और उच्चाधिकारियों तक ही सीमित रहती है। हाल ही के सालों में स्विस बैंक ने ऐसे कानून लागू किए जिसकी वज़ह से खातों से जुड़ी जानकारियों का पता लगाना लगभग असंभव सा हो गया। जिसकी वज़ह से टैक्स चोरी और काला धन पता लगाना दुनिया के किसी भी देश की सरकार के लिए नामुमिकन हो गया।

क्या आज भी स्विस बैंक का कानून उतना ही जटिल है, जितना पहले था ?

इसका सीधा सा ज़वाब है नहीं। लगातार कई सालों तक कई मुल्कों ने खासतौर से अमेरिका ने अपने देश के लोगों से जुड़े खातों की जानकारियां स्विट्जरलैंड से मांगी। जानकारियां साझा ना करने के कारण स्विट्जरलैंड को मिलने वाली अमेरिकी ड्रग कंट्रोल फंडिंग रोक दी गयी। अपने कायदे-कानूनों पर कायम रहते हुए स्विस बैंक ने किसी भी तरह की अमेरिकी मदद लेने से इंकार कर दिया। अमेरिका पर हुए 9/11 आंतकी हमले की कड़िया स्विस खातों से जुड़ी पायी गई थीं। जानकारी सामने आते ही दोनों देशों के तालुक्कातों में कड़वाहट दिखने लगी। मौजूदा दौर में कहा जा सकता है कि स्विस बैकों में गोपनीयता का दौर तकरीबन खत्म हो गया है। स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (Swiss Federal Tax Administration) अक्टूबर 2018 तक खुले सभी खातों की सूचनाएं संबंधित देशों को मुहैया करवा रहा है। स्वचालित प्रक्रिया के तहत खाताधारक का नाम, पता, बैलेंस अमाउंट से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक की जा रही हैं। जिससे संबंधित देशों के अधिकारियों को कर चोरी की जांच करने में, किसी तरह की दिक्कतों का कोई सामना ना करना पड़े।

आखिरकार लोग स्विस बैंक में पैसे क्यों रखते हैं ?

अब तो आप भी समझ ही गए होंगे कि स्विस बैंक 2018 या उसके बाद बनी संस्था नहीं है। ये कई सालों से वजूद में है। साल 2018 के दौरान स्विस बैकिंग व्यवस्था काफी दबावों के बाद खाताधारकों की जानकारियां साझा करने के लिए राज़ी हुई। मान लीजिए कि अगर आपके साल 2018 से पहले का स्विस खाता है और आपके पास तेज़तर्रार वकील और समझदार अकाउंटेंट है तो आपके पैसों को कोई खतरा नहीं। मौजूदा वक़्त में स्विस बैंक आपकी सम्पति बचाने में मदद नहीं कर सकता लेकिन आपके पैसे और सम्पत्ति को रखने में मदद ज़रूर कर सकता है।

ये जानना बेहद अहम है कि स्विस बैंक में जमा सभी सम्पति तानाशाह और ड्रग्स कारोबारियों (drug lords) की नहीं है। कुछ दवा व्यवसायी अपनी सम्पति का कुछ हिस्सा खुद से बचाने के लिए यहाँ रखा करते थे।

स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था के स्थिर रहने की अहम वज़ह यह है कि यहाँ जमा की गई धन राशि वैश्विक संकट के समय पर भी यहीं पर सुरक्षित रहती है। स्विस बैंक में जमा राशि आपके भविष्य निधि (provident funds) की तरह होती है। जिससे ज़्यादा लाभ तो नहीं होता है लेकिन पैसे के सुरक्षित रहने की गारंटी अवश्य रहती है।

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