..और बढ़ेगी China की दिक्कतें, अब इन 2 बड़े देशों ने लिया बड़ा फैसला

चीन अपने अड़ियल रवैये (Obstinate attitude) के कारण वैश्विक स्तर पर घिरता दिख रहा है। हाल ही में अफ्रीकी देश सोमालीलैंड (African country Somali

न्यूज़ डेस्क (एजेंसियां/विश्वरूप प्रियदर्शी): चीन अपने अड़ियल रवैये (Obstinate attitude) के कारण वैश्विक स्तर पर घिरता दिख रहा है। हाल ही में अफ्रीकी देश सोमालीलैंड (African country Somaliland) ने ताइवान के साथ राजनयिक रिश्ते (Diplomatic relations) कायम करके, बीजिंग के हुक्मरानों को आईना दिखाया है। दूसरी ओर अमेरिका लगभग सभी मोर्चों पर चीन की घेराबंदी करने में लगा हुआ है। दक्षिण चीन सागर में अमेरिका ने जंगी बेड़े यूएसएस रोनॉल्ड रीगन और यूएसएस निमित्ज़ (USS Ronald Reagan and USS Nimitz) को उतार दिया है। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार चीन पर ट्रेड और डिजीटल स्ट्राइक (Trade and digital strikes) करने का पूरा मन बन चुके है।

बदलते घटनाक्रम के तहत अमेरिका और आस्ट्रेलिया, भारत के तर्ज पर टिक टॉक समेत चीनी मोबाइल ऐप पर बैन लगाने के लिए काफी संजीदगी से बातचीत कर रहे है। अन्दरखाने खब़र ये भी है कि, प्रशासनिक स्तर (Administrative level) पर इसका मसौदा दोनों देशों ने तैयार कर लिया है। इस मसले पर खुद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (US Secretary of State Mike Pompeo) ने खुलासा किया है। दूसरी ओर आस्ट्रेलिया में भी ये मांग जोर पकड़ चुकी है। भारत द्वारा टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद टिकटॉक चलाने वाली कम्पनी बिटडांस (Company Bitdance) को तकरीबन 6 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो चुका है।

चीनी मोबाइल्स ऐप्स की संदिग्धतता (Doubtfulness) के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा- ये मोबाइल ऐप्स चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सर्विलांस सिस्टम (Chinese Communist Party’s surveillance system) के तौर पर काम करते है। ऐसे में यूजर की निजता और गोपनीयता को भारी खतरा है। चीन किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय तथ्यों को हासिल करने के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल करता है। यूजर से जुड़े डेटा का एक्सेस सीधे सीपीसी (Communist Party of China) के बड़े अधिकारियों को मुहैया करवाया जाता है।

गौरतलब है कि यूजर की निजता के चलते ही भारत सरकार ने टिकटॉक के सीईओ केविन मेयर (Tiktok CEO Kevin Mayer) को आधिकारिक पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था। अभी भी चीन भारत में पैठ बनाने की जुगत लगा हुआ है। ताजा मामले में चीनी स्कैमर्स (Chinese Scammers) लगातार भारतीय यूजर्स को फुसलाने की कोशिश कर रहे है। भारतीय उपभोक्ताओं को फिशिंग ईमेल और मैसेज (व्हाट्सएप और एसएमएस) भेजकर टिकटॉक का नया वर्जन टिकटॉक-प्रो (Tiktok-Pro) डाउनलोड करने का झांसा दिया जा रहा है।

आस्ट्रेलिया और अमेरिका का ये संयुक्त प्रयास कहीं ना कहीं दक्षिण-पूर्वी एशिया और एशिया प्रशांत (Southeast Asia and Asia Pacific) इलाके में चीनी हरकतों पर लगाम कसने का काम करेगा। हालांकि अमेरिका ने इससे पहले ही नेस्डेक और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (Nasdaq and New York Stock Exchange) से चीनी कम्पनियों को बाहर जाने का रास्ता दिखा गया है। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन ने उन सभी चीनी छात्रों और शोधार्थियों को देश से बाहर निकालने की तैयारी कर ली है, जिनके संबंध सीपीसी और पीएलए (People’s Liberation Army) से है। राजनयिक स्तर पर उन सभी चीनी नेताओं की अमेरिकी वीज़ा हासिल नहीं हो पायेगा, जिनकी भूमिका हांगकांग में नया सुरक्षा कानून (New Security Law in Hong Kong) बनाने और लागू करने में रही थी। कुल मिलाकर दोनों देशों द्वारा लिये जाने वाले फैसले से ड्रैगन (Dragon) की बौखलाहट तय मानी जा रही है।

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