होली पर देश के लिए आयी बुरी खब़र

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दिल्ली (ब्यूरो): भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) काफी नाजुक दौर से गुजर रही है। कोरोना वायरस (Corona virus) के चलते अर्थव्यवस्था की गति काफी सुस्त चल ही रही थी, इस बीच यस बैंक (Yes Bank) दिवालिया हो गया। सेंसेक्स (Sensex) धड़ाम से नीचे आ गिरा। रूस (Russia) और सऊदी के बीच चल रहे कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों का विवाद लगातार भारतीय तेल और गैस कंपनियों (Oil and gas companies) के शेयर्स को झटका दे रहा है। इन सबके बीच इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसी मूडीज़ (International Rating Agency Moody’s) देश के लिए एक और बुरी खब़र लेकर आया है। बीते सोमवार मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (Investors Service) ने साल 2020 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) की दर का अनुमान 5.4 फीसदी से घटाकर 5.3 कर दिया है।

होली के चलते फिलहाल बाजार बंद है। कल जैसे ही कामकाजी वाले दिन दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर कामकाज शुरू होगा तो उम्मीद जताई जा रही है कि सेंसेक्स एक बार फिर धड़ाम से नीचे गिर सकता है। जिस तरह से जीडीपी (GDP) की अनुमानित दर मूडीज की ओर से कम की गयी है उससे निवेशकों (Investors) में सकते का माहौल है। गौरतलब है कि मूडीज़ ने  इसका आकलन बेसलाइन फोरकास्ट (Baseline forecast) के आधार पर किया है। फिलहाल मूडीज़ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्टबेल (Stable economy) की श्रेणी से निकालकर नकारात्मक (Negative economy) वाली श्रेणी में डाल दिया है। दूसरी अन्य रेटिंग एजेन्सियों (Fitch and S&P) ने फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बताया है।

साथ ही मूडीज़ ने ये ऐलान भी किया कि, अगर किसी तरह कोरोना वायरस पर काबू पा भी लिया जाता है तो, अगली तिमाही (Quarter) में वैश्विक आर्थिक गतिविधियों (Global economic activities) में किसी भी तरह की तेजी की संभावना ना के बराबर रहेगी। कोरोना वायरस के चलते उत्पादों की सप्लाई चैन (supply chains) टूटी है। उपभोग, निवेश, आयात-निर्यात और विनिर्माण (Consumption, Investment, Import-Export and Manufacturing) में भारी गिरावट दर्ज की गयी है। इसी वज़ह से साल की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती छायी हुई है। दूसरी छमाही में उत्पादन, उत्पाद और उपभोक्ता (Production, Products and Consumers) की में मांग में बढ़ोत्तरी आने से थोड़ा बहुत डैमेज कन्ट्रोल (Damage Control) हो सकता है।

फिलहाल मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था का जो आकलन किया है, उससे निवेशकों पर जोखिम (risk) और सरकार पर दबाव बढ़ जायेगा। इसका सीधा असर देश के आर्थिक सुधारों (Economic reforms) पर पड़ेगा। पीएम मोदी का 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था (5 trillion dollar economy) का सपना डगमगा सकता है।

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