Ram Mandir Trust: ट्रस्टी बनने के लिए आपस में भिड़े साधु-सन्यासी

संत समाज से आवाज़े उठने लगी कि, ट्रस्ट में राम जन्मभूमि से जुड़े कई लोगों को शामिल नहीं किया गया है। जिसके

दिल्ली: बीते सोमवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) ने राम मंदिर के लिए श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Mandir Tirth Shetra Trust) के गठन की घोषणा की। साथ ही इसके न्यासियों (Trustees) के नाम भी सामने आये। ट्रस्ट का अध्यक्ष वरिष्ठ वकील (Senior advocate) परासरन को बनाया गया है। परासरन ने ही न्यायालय (Court) में रामलला पक्ष की वकालत (Advocacy) की थी। जैसे ही ट्रस्टियों के नामों का खुलासा हुआ तो अयोध्या के साधु समाज में तनातनी के हालात बनते दिखे।

संत समाज से आवाज़े उठने लगी कि, ट्रस्ट में राम जन्मभूमि से जुड़े कई लोगों को शामिल नहीं किया गया है। जिसके इस आंदोलन (movement) से जुड़े पुराने लोगों के साथ नाइंसाफी है। इससे सन्त समाज में खासा नाराजगी पसरी हुई है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) भी मस्जिद के लिए अयोध्या से दूर ज़मीन मिलने पर नाराज़ है।

सूत्रों के अनुसार महन्त सुरेशदास की अगुवाई में एक बैठक (meeting) का आवाह्न किया गया है। महन्त सुरेशदास के मुताबिक केन्द्र सरकार ने संत समाज को अपमानित किया है। बुलाई गयी सभा में सभी अयोध्या के सभी सम्प्रदाय के संत सम्मिलित होगें। इसी दौरान आगे की कार्रवाई पर निर्णय किया जायेगा। अगर जरूरत पड़ी तो संत समाज सड़कों पर उतरने से भी नहीं चूकेगा। संत समाज की ये बैठक आज 3 बजे निर्धारित की गयी है। राम मंदिर आंदोलन के जाने पहचाने चेहरे महन्त नृत्य गोपाल दास को भी ट्रस्ट में शामिल नहीं किया गया है। जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनके नाम की अनुशंसा (Recommendation) की थी।

दूसरी ओर महन्त नृत्य गोपाल दास ने केन्द्र के फैसले को आड़े हाथों लेते हुए, इसे अयोध्या के साधु संतों का अपमान बताया। उनके मुताबिक जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन में लगा दिया उन्हें ट्रस्ट से दरकिनार किया जा रहा है। दूसरी ओर कमल नयन दास ने ट्रस्ट में शामिल विमलेश मोहन प्रताप मिश्रा पर सियासी ज़मात से होने का आरोप लगाया और उनके न्यास (Trust) में शामिल होने को लेकर सवालिया निशान लगाया । विमलेश मोहन प्रताप मिश्रा अयोध्या राजपरिवार से जुड़े हुए है।

मोदी सरकार के इस फैसले से मुस्लिम समुदाय में भी असंतोष (Dissatisfaction) का माहौल है। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि अयोध्या से दूर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को ज़मीन-आबंटित (Land allocation) करना गलत फैसला है। गौरतलब है कि राम जन्मभूमि के न्यासियों में प्रसन्नतीर्थ जी महाराज (उडुपी के पेजावर मठ से),  वरिष्ठ अधिवक्ता के.परासरण, जगदगुरु शंकराचार्य, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (अयोध्या राज परिवार), जगदगुरु माधवाचार्य स्वामी विश्व युगपुरुष परमानंद जी महाराज (हरिद्वार), स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज (पुणे) और ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज (इलाहाबाद) का नाम शामिल हैं।

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