Ram Mandir Verdict: राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर Supreme Court ने सुनाया अभूतपूर्व फैसला

आखिरकर आज राम मंदिर मामले पर अन्तिम फैसला आ ही गया। राम मंदिर विवाद साल 1528 से चल रहा था। आज न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अगुवाई वाली न्यायिक पीठ ने फैसला सुनाया है। उन्होंने 491 साल पुराने विवाद पर विराम लगा दिया है। रंजन गोगोई के करियर के लिए ये लम्हा बेहद अहम् है। उनका सुनाया ये फैसला इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो जायेगा। राम मंदिर विवाद पर फैसला देकर एक बड़ी समय सीमा में खुद को साक्षी बनाया है। इस समय सीमा के किरदारों की फेहरिस्त मंगोल शासक बाबर और उसके सेनापति मीर बांकी से होते हुए, ब्रिटिश शासक, संघ परिवार, विश्व हिन्दू परिषद, कल्याण सिंह, नरसिम्हा राव, राजीव गांधी, अशोक सिंघल, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, मुलायम सिंह यादव, लालकृष्ण आडवाणी, निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक़्फ बोर्ड और राम लला विराजमान तक आकर थमती है।

ऑर्ब्जवेशन बिन्दु जो फैसले का कारण बने

पाँचों जजों ने एकमत होते हुए सर्वसम्मति से फैसला जारी किया है।
शिया वक्फ बोर्ड के दावे को न्यायिक पीठ ने एक सिरे से खाऱिज कर दिया।
सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा विचारणीय है।
बकौल सीजेआई सभी धर्मों को एक नज़र से देखना सरकार का काम होता है।
निर्मोही अखाड़े का दावा सेवायत के तौर पर खाऱिज कर दिया गया है।
राम जन्म भूमि बतौर पक्षकार न्याय की मांग करता कोई व्यक्ति नहीं है।
ASI की रिपोर्ट को खाऱिज करने के कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है।
रामलला विराजमान को न्यायिक वैधता हासिल है।
खुदाई में मिला पुरातात्विक ढ़ांचा गैर-इस्लामिक था।
ऑर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की खुदाई की रिपोर्टों का नकारा नहीं जा सकता।
मंदिर और मस्जिद बनाने के बीच 400 सालों का अन्तर है।
आस्था पर आधारित भूमि के मालिकाना हक़ का फैसला करना न्यायिक जांच व्यवस्था से बाहर का मामला है।
भूमि के अधिग्रहण से पहले विवादित भूमि पर मुस्लिम नमाज़ पढ़ते थे।
जनसामान्य की धारणाओं के अनुसार लोग अंदरूनी हिस्से को ही राम जन्मस्थान मानते थे।
बाहरी चबूतरा, राम चबूतरा और सीता रसोई में भी हिन्दू विधानों के अनुसार विधि विधान से पूजा होती थी।
1949 से पहले तक मुस्लिम वहाँ पर नमाज़ अता करते थे।
मुस्लिमों ने विवादित भूमि पर बनी मस्जिद को कभी नहीं छोड़ा
संविधान के समक्ष सभी आस्थायें और अस्मितायें समान है।
विवादित भूमि के बाहरी हिस्से पर हिन्दू पक्षकारों को दावा सही है। अंदरूनी हिस्सा विवादित है।
1856 से पहले मुख्य गुबंद को लेकर मुस्लिम पक्ष का कोई दावा सामने नज़र नहीं आता है।

फैसले की बड़ी बातें

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को पाँच एकड़ जमीन दी जाये। ये जमीन अयोध्या में कहीं भी दी जाये। जमीन की जगह केन्द्र सरकार और राज्य सरकार तय करेगी। जहाँ पर मस्जिद बनायी जायेगी।
विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाये।
राम मंदिर निर्माण के लिए न्यास (ट्रस्ट) का गठन किया जाये।
केन्द्र सरकार मंदिर निर्माण के लिए न्यास (ट्रस्ट) का गठन तीन महीने के भीतर करे।

मामले पर संघ परिवार की पैनी नज़र

राम मंदिर निर्णय को लेकर संघ परिवार और उसके आनुषांगिक संगठन से जुड़े के बड़े चेहरों ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। सरसंघचालक मोहनभागवत, भैय्या जी जोशी इन्द्रेश कुमार और कई बड़े चेहरे डटे हुए है। तकरीबन 01:30 के आसपास वीएचपी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपना पक्ष रखेगी।

फैसले के मायने

इस फैसले की कई दूसरे छिपे मायने है। जिसमें खासतौर से शामिल है, हिन्दुस्तानी मुस्लिम के सिर से बाबर का कंलक खत्म होना। इस निर्णय ने बाबर के विरासत का खात्मा कर दिया है। एक अक्रान्ता की पहचान समाप्त हो गयी। वैसे भी इस्लाम में विवादस्पद जगह पर नम़ाज अता फरमाना हराम माना गया है। दूसरी ओर राम के नाम पर अब रोटियां सेंकना खत्म हो जायेगा। इसके साथ ही चुनावी मुद्दें से जुड़ा एक मामला इतिहास की तारीखों में दफ्न होगा। आस्था और सियासत के घालमेल का एक मसला शांत होगा।

फैसले को लेकर पीएम मोदी पहले से ही आश्वास्त दिखे

राम मंदिर पर फैसला आने से पहले पीएम मोदी काफी आश्वास्त दिखे। उनकी बॉडी लैंग्वेज़ एक दिन पहले से ही काफी सहज दिखी। उन्होनें एक दिन पहले से ही ट्विटर पर लोगों से सौहार्दपूर्ण माहौल बनाये रखने की अपील की। उनके चेहरे पर तनाव की कोई लकीर नहीं दिखी। वे बेहद शांत और सधे तरीके से करतारपुर कॉरिडोर उद्धाटन कार्यक्रम में हिस्सा लेते नज़र आये।

राम मंदिर के साथ ही मुख्य न्यायधीश दो और बड़े फैसले देगें

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई राम मंदिर के साथ दो और अहम् केसों पर फैसला सुनाकर रिटायरमेंट लेगें। जिनमें सबरीमाला अयप्पा मंदिर में महिलाओं को लेकर प्रवेश का केस और राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का मामला शामिल है। इन तीनों केसों की सुनवाई न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अगुवाई में चल रही है।

देश के कई हिस्सों में लिया गया शांति और भाईचारे का संकल्प

फैसला आने से एक दिन पहले देशभर के कई सांस्कृतिक समूहों, स्कूली छात्रों और विभिन्न धर्मों के लोगों ने शांति कायम रखने का संकल्प लिया। मुस्लिम संगठनों और हिन्दू संगठनों ने लोगों से अपील की है कि फैसला चाहे जो भी आये वो सर्वमान्य होगा। जीत का कोई ज़श्न ना मानने और हार की कोई हताशा ना जाहिर करने की अपील की गयी है।

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