Pm Modi on New Education Policy: भारत के Education System में बदलाव जरूरी था

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा कॉन्क्लेव का आयोजन किया

न्यूज़ डेस्क (शौर्य यादव) मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पीएम मोदी (Pm Modi) सहित मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे और नई शिक्षा नीति तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन भी शामिल थे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा और शैक्षणिक शोधात्मक कार्यों से जुड़े मामलों पर विमर्श करने के लिए कई सत्र भी आयोजित किये गये। नयी शिक्षा नीति के अन्तर्गत भारत में अब शिक्षा हासिल करने का नया पैटर्न  5+3+3+4 होगा। जो कि पहले 10+2+3 हुआ करता था। साथ ही इसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम  भी लागू किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री विद्यार्थियों को डिग्री दी जायेगी। इससे उन छात्रों को फायदा होगा जो किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ देते है।

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का Bias है, या किसी एक ओर झुकी हुई ।
  • हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपनी National Values के साथ जोड़ते हुए, अपने National Goals के अनुसार Reform करते हुए चलता है। मकसद ये होता है कि देश का Education System, अपनी वर्तमान औऱ आने वाली पीढ़ियों को Future Ready रखें, Future Ready करें।
  • एनईपी ने एक स्वस्थ बहस को जन्म दिया है और हम जितना अधिक चर्चा करेंगे और बहस करेंगे उतना ही शिक्षा विभाग को लाभ होगा। यह स्पष्ट है कि इस विशाल योजना को कैसे लागू किया जाएगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं। हम सभी मिलकर इसे लागू करेंगे। आप में से प्रत्येक एनईपी के कार्यान्वयन में सीधे शामिल है। राजनीतिक इच्छाशक्ति के संदर्भ में, मैं पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं और आपके साथ हूं।
  • बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में Curiosity और Imagination की Values को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था।
  • आज गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है। वो कहते थे – “उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।” निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है।
  • हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में passion न हो, philosophy of education, purpose of education न हो।
  • इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। School Curriculum के 10+2 structure से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 curriculum का structure देना, इसी दिशा में एक कदम है।
  • आज मुझे संतोष है कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया। बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है। एक नया Global Standard भी तय हो रहा है।
  • हमें हमारे छात्रों को ग्लोबल सिटिजन तो बनाना है, इसका भी ध्यान रखना है कि वो इसके साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें।
  • जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है।
  • इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। ये एक बहुत बड़ी वजह है, जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, पांचवी कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है।
  • अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए Inquiry-based, Discovery-based, Discussion based, और Analysis based तरीकों पर जोर दिया जाए। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।
  • हर विद्यार्थी को ये अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने Passion को Follow करे। वो अपनी सुविधा और ज़रूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को Follow कर सके और अगर उसका मन करे, तो वो छोड़ भी सके।
  • कोई कोर्स करने के बाद स्टूडेंट जब जॉब के लिए जाता है तो उसे पता चलता है कि जॉब की रिक्वायरमेंट पूरा नहीं करता है। कई स्टूडेंट अलग-अलग वजहों की स्थिति में कोर्स छोड़कर जॉब करनी पड़ती है। ऐसी सभी स्थितियों का खयाल रखते हुए multiple entry और Exit का ऑप्सन भी दिया गया है।
  • जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में student education और Dignity of Labour पर बहुत काम किया गया है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे देश में रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने वाली है। जब Institutions और Infrastructure में भी ये Reforms reflect होंगे, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अधिक प्रभावी और त्वरित गति से Implement किया जा सकेगा।
  • शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, देश को अच्छे छात्रों, अच्छे प्रोफेशनल्स और उत्तम नागरिक देने का बहुत बड़ा माध्यम आप सभी अध्यापक और प्रोफेसर्स ही हैं। इसलिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी- राष्ट्रीय शिक्षा नीति में dignity of teachers का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
  • शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, देश को अच्छे छात्र, अच्छे प्रोफेशनल्स और उत्तम नागरिक देने का बहुत बड़ा माध्यम आप सभी अध्यापक और प्रोफेसर्स ही हैं। इसलिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी- राष्ट्रीय शिक्षा नीति में dignity of teachers का भी विशेष ध्यान रखा गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके Implement नहीं होगी। इसके लिए मन बनाना होगा, आप सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए आपके लिए ये कार्य एक महायज्ञ की तरह है।

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