China की शह पर India को आंखे दिखाता Nepal

China की शह पर India को आंखे दिखाता Nepal। चीन अच्छे से जानता है कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख़ बेहतरीन है।

नई दिल्ली (प्रगति चौरसिया): भारत से सामरिक, रणनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर मुँह की खाने के बाद अब चीन ने नेपाल (Nepal) को आगे किया। चीन (China) अच्छे से जानता है कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख़ बेहतरीन है। ऐसे में सीधे तौर पर भारत को घेरना नामुमकिन है। इसलिए नेपाल में चीन प्रायोजित तौर पर भारत के खिल़ाफ लामबंदी करवा रहा है। गौरतलब है बीते दिनों रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर पिथौरागढ़- धारचूला से लिपुलेख तक बनी नयी सड़क उद्घाटन किया। 17 हज़ार फीट की ऊंचाई पर बनी, ये 80 किलोमीटर लंबी सड़क घियाबागढ़ से निकलकर लिपुलेख दर्रे के पास मानसरोवर पर खत्म होती है। इसकी मदद से कैलाश मानसरोवर की यात्रा 3 हफ़्तों से घटकर 1 हफ़्ते की हो जायेगी। सड़क बनाने का काम Border Road Organistion ने किया है। कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं के अलावा ये सड़क स्थानीय लोगों को भी काफी सहायता पहुचायेगी।

नेपाली संसद में मंत्री प्रदीप ग्यावली ने लिंक रोड पर नाराज़गी ज़ाहिर की। संसदीय बैठक के दौरान नेपाली विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि, लिपुलेख और कालापनी दोनों इलाके नेपाल संप्रभुत्व क्षेत्र में आते हैं। जिसे भारत और नेपाल ने आपसी समझ से कायम किया था। ऐसे में भारत सरकार ने अवैध निर्माण कर नेपाली संप्रभुता को चुनौती दी। अब नेपाल भारत से बातचीत कर मसला सुलझाना चाहता है। हालांकि इससे पहले प्रधानमंत्री केपी ओली और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड भी निर्माण कार्य पर आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं। मामला सामने आने पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तल्खियां दिखी।

भारत की ओर से मामले पर सफाई आ चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के मुताबिक पिथौरागढ़- धारचूला लिपुलेख लिंक रोड पूरी तरह से भारत प्रशासित इलाके में है। लिंक रोड कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया है। पहले भी कई बार तीर्थयात्री इस रास्ते का इस्तेमाल करते आये है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नेपाल सरकार के आरोपों को सिरे से खारिज किया।

दरअसल गहमागहमी की वज़ह लिपुलेख दर्रे का पश्चिमी इलाका है, जो कि कालापानी के नज़दीक है। विवादित इलाके में नेपाल और भारत अक्सर अपना हक़ जताते आये है। नेपाल इसे अपने नियन्त्रण में आने वाले धारचूला का हिस्सा समझता है। वहीं दूसरी ओर भारत इसे उत्तराखंड का हिस्सा मानता आया है। नया लिंक रोड कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए गेटवे से कम नहीं।

नेपाल को मिली चीन की शह

कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक नेपाल के इस रूख़ के पीछे चीन का सीधा हाथ है। डोकलाम सहित दूसरे मोर्चों पर चीन भारत से सीधे तौर पर टक्कर लेने से बचता आया है। इससे पहले भी कई दफ़े चीन ने नेपाल में भारत विरोधी प्रदर्शन प्रायोजित किये है। नेपाल को मज़बूरन चीन का साथ देना पड़ता है, क्योंकि चीन नेपाल के कई हिस्सों में निवेश करने के साथ बड़े प्रोजेक्ट्स भी चला रहा है। साथ ही समय-समय पर चीन की कम्युनिस्ट सरकार नेपाल को फडिंग करती रही है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का वैचारिक सामंजस्य किसी से छिपा नहीं है।

चीनी इशारे पर नेपाल, भारत की अन्तर्राष्ट्रीय साख पर बट्टा लगाने की कोशिश कर रहा है। अगर मामला तय सीमा से आगे बढ़ता है तो संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत को इसके खिल़ाफ आव़ाज उठानी चाहिए।

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