Kabaad The-Coin के Music का ताना-बाना

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एन्टरटेनमेन्ट डेस्क (शंशाक शेखर): रंग रसिया, मांझी- द माउंटेन मैन, कभी ख़ुशी कभी ग़म, गंगाजल, जब वी मेट और हाल ही में रिलीज़ हुई शिकारा जैसी फिल्मों में क्लासिक म्यूजिक (Classic music) देने वाले सन्देश शांडिल्य (Sandesh Shandilya) की म्यूजिक की दुनिया में एक अलग पहचान हैं| वो सिर्फ म्यूजिक के लिये ही नहीं बल्कि म्यूजिक की originality और उसके inventive style के लिए जाने जाते है। उनके संगीत में उनकी सोच झलकती है। उनका यहीं मिज़ाज म्यूजिक इंडस्ट्री (Music industry) के लिए नयी इबारत गढ़ता है। फ़िलहाल सन्देश चर्चित फिल्मकार वरदराज स्वामी (Varadaraja Swamy) की आने वाली फिल्म कबाड़ द कॉइन के लिए म्यूजिक दे रहे हैं| निर्देशक वरदराज स्वामी ने सन्देश की म्यूजिक की गहरी समझ और उनके काम करने के तौर-तरीके के बारे में अपने अनुभव साझा किये।

डायरेक्टर वरदराज स्वामी ने कहा- म्यूज़िक की दुनिया में सन्देश शांडिल्य किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनके पास मेलोडी का खजाना (Melody Treasure) है। उन्होनें एक से बढ़कर एक मेलोडी बॉलीवुड को दी। जिसे भुलाया नहीं जा सकता। चाहे वो Chameli, Jab we met या Kabhi Khushi Kabhi Gum या फिर Socha na tha हो। मैं सन्देश का फैन रहा हूँ, उनकी हर धुन एक साइकोलॉजिकल मेलोडी (Psychological Melody) होती है। कम्पोजीशन (Composition) बिल्कुल मन में उतर जाती है। सन्देश के छोटे भाई संदीप शांडिल्य से मेरे बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। वो फिल्म Manjhi-The Mountain man में हमारे executive producer थे। मैनें काफी पहले से सोच रखा था कि, मैं जब भी फिल्म बनाऊंगा, सन्देश शांडिल्य को संगीतकार (Musician) रखूँगा। जब मैंने अपनी फिल्म कबाड़ द-कॉइन स्टार्ट की तो, मैंने अपने producer के सामने ये सुझाव रखा कि सन्देश से म्यूजिक करवाएंगे। वो तैयार हो गए। मैंने संदीप को बोला सन्देश से एक मीटिंग arrange करवाये। मुझे अपनी फिल्म के म्यूजिक के बारे में बात करनी है। संदीप ने कहा-यार वो बहुत busy हैं किसी और म्यूजिक डायरेक्टर (Music director) से करवा लेते हैं।

संदेश शांडिल्य के बारे में उन्होनें आगे कहा- उस वक़्त सन्देश शिकारा का म्यूजिक कम्पोज (Music compos) रहे थे। वो उनका बेहद महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट (Ambitious project) था। फिर भी संदीप ने मीटिंग arrange की| सन्देश ने तीन बजे अपने स्टूडियो (Studio) में बुलाया। मैं और शहजाद मिलने के लिए गए। उन्होंने कहा देखो मुझे कहानी अच्छी लगेगी तभी कर पाऊंगा| मैंने उनको कहानी सुनाई उन्होंने कहा मैं बताता हूँ। मैंने संदीप से बोला कुछ हाँ या ना नहीं बताये। संदीप ने उनसे पूछा कबाड़ द-कॉइन में काम करने के लिए एक बार फिर से पूछा, उन्होनें कहा कहानी में एक बार फिर से सुनना चाहूंगा। मैनें दुबारा उन्हें कहानी सुनायी। उन्होनें कहानी बेहतरीन बताते हुए तुरन्त की प्रोजेक्ट करने की हामी भर दी। सन्देश शांडिल्य ने दस दिन का वक़्त लिया। मैं दुबारा उनके पास गया संदेश ने कहा मुझ लिखकर बताइये क्या चाहते है। मुझसे किस तरह के म्यूज़िक की उम्मीद कर रहे हो। मैनें उनकी पूरी सिचुएशन (Situation) का Visual लिखकर दे दिया। सन्देश आदतन (Habitually) फिल्म की कहानी में घुस जाते हैं। करैक्टर की साइकोलॉजी पकड़कर म्यूजिक devlop करते हैं। सन्देश को बहुत अच्छा लगा और उन्होंने ने कहा मज़ा आ गया आप लोगों ने इतना कुछ लिखकर दे दिया। उन्होंने पहला गाना तीन महीने के अन्दर कंपोज कर दिया। बीच-बीच में वो मेरी सलाह लेते रहे। फिल्म में तीन गाने है तीनों को कंपोज करने में 9 महीनों का वक़्त लग गया। कैलाश खेर, सुनिधि चौहान, अंकित तिवारी और शाशा तिरूपति ने फिल्म के गानों को आवाज़ दी। मुझे पूरी उम्मीद है लोगों का गाने पसन्द आयेगें।

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