राजस्थान से जुड़ते एमपी के तार, दोनों दोस्त फिर से साथ आ सकते हैं नजर

ज्यादातर संभावनायें (Possibilities) कांग्रेस के खिलाफ जाती दिख रही हैं। सचिन पायलट के हालात ज्योतिरादित्य

नई दिल्ली (ब्यूरो): सूत्रों की माने तो कांग्रेस (Congress) को अभी कई और झटके लग सकते हैं। खबर सामने आ रही है कि कांग्रेस से इस्तीफा (Resignation) देने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने सचिन पायलट (Sachin Pilot) से गुपचुप तरीके से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा सकते हैं। लेकिन ज्यादातर संभावनायें (Possibilities) कांग्रेस के खिलाफ जाती दिख रही हैं। सचिन पायलट के हालात ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा जुदा नहीं है। दोनों ही कांग्रेसी शीर्ष नेतृत्व (Congress top leadership) की बेरुखी के मारे है। दोनों को ही, वो ओहदा (Position) और जिम्मेदारियां (Responsibilities) नहीं मिली जिसके वो काबिल थे। इंसानी फितरत के चलते दोनों में ही कांग्रेस आलाकमान को लेकर नाराजगी भरी हुई है।

गौरतलब है कि दोनों ही अपने-अपने सूबों में नंबर दो की हैसियत रखते हैं। युवा चेहरा होने की वजह से दोनों के नाम पर कांग्रेस में अच्छा खासा वोट बटोरा। राजस्थान और मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों (Rajasthan and Madhya Pradesh Assembly Elections) में दोनों को ही सीएम के तौर पर पेश किया गया था। एमपी और राजस्थान की जनता कांग्रेस के इस दांव में फंस गई। और आखिरकार अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और कमलनाथ (Kamal Nath) के हाथों में सूबे की कमान आ गई। जिससे जनता ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया। दोनों ही राज्य हिंदी भाषी है। हिंदी भाषी राज्यों (Hindi speaking states) में जनता का राजनीति के साथ कहीं ना कहीं भावनात्मक जुड़ाव (Emotional connection) भी रहता है। जिसका कांग्रेस ने मखौल उड़ाया

विधानसभा चुनावों के प्रचार अभियान (Election campaign) के दौरान खुद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने दोनों के नामों की पैरवी की थी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद जिन नतीजों की उम्मीद दोनों कर रहे थे उस पर कांग्रेस आलाकमान ने पानी फेर दिया। कांग्रेस में आपसी खींचतान का आलम इस कदर देखने में आया कि राहुल गांधी की पैरवी तक को दरकिनार कर दिया गया। जिन चेहरों के दम पर कांग्रेस ने दोनों राज्यों में सत्ता हासिल की थी। उन्हें अज्ञातवास में भेज दिया गया। कहीं ना कहीं कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं (Elderly leaders) को कांग्रेसी युवा नेतृत्व आंखों की किरकिरी लगा। जिसके चलते हुए वे उन्हें पनपने का मौका नहीं देना चाहते।

हालिया सियासी तस्वीर काफी दिलचस्प बनती दिख रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेसी बेरुखी के सामने हथियार डाल दिए। सचिन पायलट कब तक कांग्रेस का दामन थामे रहते हैं ? जिस समीकरण (Political equation) का जिक्र यहां किया गया है। कांग्रेस के लिए काफी घातक हो सकता है।

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