Monsoon Parliament Session: कई सांसद निकले कोरोना पॉजिटिव, खास सावधानी बरतने के निर्देश

लंबी जद्दोजहद के बाद संसद का मानसून सत्र (Monsoon Parliament Session) आज शुरू हो गया। राज्यसभा में संसदीय

नई दिल्ली (दिगान्त बरूआ): लंबी जद्दोजहद के बाद संसद का मानसून सत्र (Monsoon Parliament Session) आज शुरू हो गया। राज्यसभा में संसदीय प्रक्रिया के तहत पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धाजंलि दी गयी। इस बीच आयी एक खब़र ने सत्र में खटास डालने का काम किया। मिल रही सूचनाओं के मुताबिक मीनाक्षी लेखी, अनंत कुमार हेगड़े, प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, सुखबीर सिंह, प्रताप राव जाधव, जनार्दन सिंह, हनुमान बेनीवाल, सेल्‍वम जी, प्रताप राव पाटिल, रामशंकर कठेरिया, सत्‍यपाल सिंह समेत तकरीबन 17 सांसद कोरोना पॉजिटिव पाये गये है।

हाल ही में मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के उच्चाधिकारियों की देखरेख में सांसदों और तकरीबन 4000 कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट करवाया गया था। टेस्ट की ये व्यवस्था बीते संसद परिसर में ही की गयी थी। संसद सत्र में हिस्सा लेने वाले लोगों का टेस्ट ऐहतियाती तौर पर करवाया गया था। अब जल्द ही कोरोना गाइडलाइंस के तहत ये सभी सांसद खुद को क्वारंटीन कर लेगें।

मॉनसून सत्र को कोरोना के साये के बीच कामयाब करने के लिए काफी कदम उठाये गये है। जिसके तहत संसद भवन के परिसर में कोरोना प्रोटोकॉल का खास ध्यान रखा जा रहा है। दोनों ही सदनों के सचिवालय ये सुनिश्चित कर रहे है कि संसद परिसर में कोई भी शख़्स कोविड टेस्ट रिपोर्ट (Covid Test Report) बिना दिखाये दाखिल ना हो पाये। कर्मचारी, सांसद, पत्रकार सभी के लिए कोविड टेस्ट रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।

दूसरी ओर लोकसभा में भारत में बढ़ रहे कोरोना संकट पर विस्तृत चर्चा की गयी। इस दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने सभी सभासदों को कोरोना के मौजूदा हालातों से अवगत करवाया।स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक कोरोना के कारण ज्यादातर मौतें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, यूपी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, असम, केरल और गुजरात में हुई है। मंत्रालय और केन्द्र सरकार के प्रयासों के कारण काफी हद तक कोरोना को रोकने में कामयाबी हासिल हुई है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक तकरीबन 10 लोगों पर 3,328 संक्रमण के मामले और 55 मौतें सामने आ रही है। ये आंकड़े दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले बेहद कम है।

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