International Labour Day: मजबूरी से बना मजदूर

जिसकी श्रम शक्ति की कीमत तयशुदा या कभी-कभी उससे भी कम कीमत लगाई जाती है।

न्यूज़ डेस्क (शुभम एम. पाण्डेय): मज़दूर- यह शब्द अपने आप मे ग़ुलाम प्रतीत हो रहा है, क्यों न इसे श्रमिक कह कर चर्चा को बढ़ाया जाए। इससे ये समझने में आसानी होगी कि, ये वही वर्ग है जिसकी श्रम शक्ति की कीमत तयशुदा या कभी-कभी उससे भी कम कीमत लगाई जाती है। जो अपनी शारीरिक बल क्षमता से कार्य करता है, जिसके लिए उसे श्रम आय प्राप्त होती है। किसी भी देश की श्रम शक्ति ही उसकी ताकत है,उसे ही मजदूर या श्रमिक कहा जाता है।

एक इंसान कैसे बना मजदूर- मजबूरी शब्द से बना मजदूर और एक बड़ा समूह जो निरंतर लोगों के सपनों के घर, सरकारी भवनों के निर्माण और चमक बिखेरने से लेकर देश की स्वच्छता में अपने श्रमबल से योगदान कर, निम्न स्तर का जीवन जीने के लिए मजबूर है, क्योंकि उनके पास शिक्षा का अभाव  है। कभी-कभी व्यक्ति की आर्थिक तंगी भी उसे मजदूर बनने के लिए मजबूर करती है ।

विश्व इतिहास पर प्रकाश डाले तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई 1986 को हुई थी। अमेरिकी मजदूर संघो ने कार्यावधि की समय-सीमा 8 घंटे से ज्यादा न करने के लिए हड़ताल की थी। मौजूदा वक़्त में भारत और अन्य 80 देशों में कानूनन 8 घंटे की ही कार्यावधि तय है ।

4 मई को शिकागो के हेमार्केटा में बम ब्लास्ट हुआ। इस बीच पुलिस द्वारा मजदूरों पर गोली चला दी गई। जिसमें कई मजदूरों की जान गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए। साल 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन का ऐलान किया गया। जिसमें हेमार्केटा  नरसंहार के निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाने के आवाह्न के साथ, मजदूर समूहों का इस दिन अवकाश होगा ये भी तय किया गया। साल भर में यही ऐसा एक दिन होता है, जब मजदूरों को सुकून से बैठने का मौका मिलता है अन्यथा इनके लिए हर दिन भोजन का जरिया मजदूरी ही है ।

हिन्दुस्तानी तारीखों की रोशनी में- 1 मई 1923 को लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान के जरिये आज़ादी से पहले मद्रास में इसकी शुरुआत हुई। उस वक़्त इसे मद्रास दिवस के तौर पर मनाया जाता था और उसी दौरान पहली बार मुल्क मे लाल परचम फहराया गया ।

हाल की अहम जानकारी-  हरियाणा सरकार के श्रम राज्य मन्त्री नायक सिंह सैनी ने कहा कि – इस साल मजदूर दिवस 1 मई को न मना कर विश्वाकर्मा दिवस पर मनाया जाएगा लेकिन मज़दूर संघ इसकी मुखालफत कर रहे है। बढ़ रहे कोरोना वायरस इंफेक्शन के मद्देनज़र सरकार की सोच को मज़दूर संघों द्वारा सकारात्मक नज़रिये से लेना चाहिए। पूंजीवादी गुलामी की बेड़ियों से आजादी का जश्न मनाने की चाह हम सब में होती है, लेकिन सबसे पहले हमारा घर, गांव, शहर, और देश आता है।

और आखिर में सभी श्रमिक समूह को हमारे Trendy News Network परिवार की ओर से मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ अनुरोध कि, मौजूदा कोरोना जैसी महामारी में किसी भी बड़े महोत्सव में ज्यादा भीड़ न करते हुए, अपने घरों में रहकर दीपक जला कर ये मजदूर दिवस वैश्विक कोरोना महामारी से मृत और इंफेक्शन ग्रसित लोगों के परिजनों को समर्पित करे।

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