बिकाऊ होती भारतीय न्यायिक व्यवस्था

ये अपने आप में एक बेहतरीन मिसाल है कि तुम मेरा कोढ़ खुजलाओं और मैं तुम्हारा। देश की आखिरी उम्मीद न्याय

– कैप्टन जी.एस. राठी
सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ का बयान:

“मैं न्यायमूर्ति चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर के साथ एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सार्वजनिक तौर पर सामने आया हूँ। न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर देश को बतायेगें कि, किस तरह के खतरे राष्ट्र के लिए उभर रहे है। जिस तरह से लोकतन्त्र खोखला होता जा रहा है, ये अपने आप में बड़े स्तर का खतरा है। यहीं कारण है कि, मैनें सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद कोई संवैधानिक पद (Constitutional post) नहीं लेने का फैसला किया है।

पूर्व CJI को राज्यसभा की मिली नामांकन (Nomination) मंजूरी ने न्यायपालिका (Judiciary) की स्वतंत्रता पर आम आदमी के विश्वास को बुरी तरह हिला के रख दिया है।

ये अपने आप में एक बेहतरीन मिसाल है कि तुम मेरा कोढ़ खुजलाओं और मैं तुम्हारा। देश की आखिरी उम्मीद न्यायपालिका है। लेकिन अब लोकतन्त्र के इस स्तम्भ ने भी समझौता कर लिया है। हालातों को देखते हुए लगता है कि अब मुल्क में जम्हूरियत खत्म हो चुकी है। व्यवस्था में बैठी चंद मुट्ठी भर जोकें देश को हाशिये पर रखते हुए  राष्ट्रवाद (Nationalism) के नाम पर पूरे मुल्क को गड्ढे में ले जा रही है। देश का संवैधानिक ताना-बाना (Constitutional fabric) अपनी संपूर्ण पवित्रता और अखंडता खो चुका है। 

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