India China Standoff: दक्षिण-एशिया में America ने साफ अपनी मंशा, तैनात किये B-2 Spirit Stealth Bomber

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नई दिल्ली (शौर्य यादव): India China Standoff के मसले पर लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की पांच वार्तायें विफल हो चुकी है। China मई महीने से ही फिंगर एरिया, गलवन घाटी, हॉट स्प्रिंग्स और कुंगरंग नाला (Finger Area, Galvan Valley, Hot Springs and Kungrang Nala) सहित कई इलाकों में अभी डटा हुआ है। जिसके कारण पीपुल्स लिब्ररेशन ऑर्मी और इंडियन ऑर्मी (People’s Liberation Army and Indian Army) के बीच लगातार गतिरोध बना हुआ है। इसी वज़ह से बीजिंग का कूटनीतिक रवैया नई दिल्ली को जरा भी रास नहीं आ रहा है। चीनी वार्ताकारों (Chinese negotiators) का बर्ताव लगातार टालमटोल वाला बना हुआ है। वो पीछे हटने की बात तो करते है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अपने आश्वासनों को लागू नहीं करता है। जिसके चलते दक्षिण-एशिया का सामरिक संतुलन लगातार बिगड़ता (South Asia’s strategic balance continues to deteriorate) जा रहा है।

ताजा बनते हालातों के बीच अब इस प्रकरण में अमेरिकी सैन्य बलों का हस्तक्षेप (US military forces intervene) हो चुका है। चीन के विस्तारवादी रवैये पर लगाम कसने के लिए भारत से महज़ 3000 किलोमीटर पर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे दिएगोगार्शिया पर वाशिंगटन ने स्टील्थ बी-2 बमवर्षकों की तैनाती (Washington deploys stealth B-2 bombers on US military base Digogaria) कर दी है। इससे वाशिंगटन ने अपनी मंशा बीजिंग के सामने ज़ाहिर कर दी है। भारतीय सेना को इस सामरिक असंतुलन का पूर्वाभास (Indian army foreshadows strategic imbalance) हो चुका था। जिसके चलते हिंद महासागर और एशिया प्रशांत के कुछ संवेदनशील इलाकों (Some sensitive areas of the Indian Ocean and Asia Pacific) में भारतीय नौसेना ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। साथ ही नौसेना भारतीय जल सीमा में रहकर Reconnaissance और Patrolling जैसी कवायदों में लगी हुई है।

बात करे अमेरिकी B-2 Spirit Stealth Bomber की तो, ये अत्याधुनिक श्रेणी का बमवर्षक है। इसकी तकनीक अभी तक अमेरिका ने किसी से साझा नहीं की है। युद्ध के मैदान में इसे तुरूप का इक्का (Trump card in the battlefield) माना जाता है। ये पारम्परिक हथियारों को ले जाने के साथ परमाणु हथियारों को भी संचालित कर सकता है। इसे खास स्टील्थ तकनीक (Stealth technology) से बनाया गया है। जिसके चलते इसे रडार पर ट्रैक और ट्रैस करना पाना लगभग नामुमकिन है। दुश्मन देश की सीमा में घुसकर तबाही मचा सुरक्षित वापस आना इसकी मुख्य खूबी है। दिएगोगार्शिया में इसकी तैनात बीजिंग के लिए खुला संदेश है।

भारत सहित चीन के खिलाफ दूसरी एशियाई ताकतों (जापान और ऑस्ट्रेलिया) ने हाल ही में कई दौर का सैन्य अभ्यास किया है। दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के दबदबे को चुनौती देने के लिए हाल ही में जापान और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त सैन्य अभ्यास (Japan and Australia joint naval exercise) किया। इसके साथ ही फ्रांस की नौ-सेना ने भी सहयोग के लिए भारत को आश्वासन दिया। क्षेत्र में लगातार शक्ति संतुलन की कवायदों को बनाये रखने के लिए अमेरिका ने यूएसएस निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (USS Nimitz Career Strike Group), जापानी युद्धपोत जेएस काशिमा और जेएस शिमायुकी और भारत के आइएनएस राणा और आइएनएस कुलिश ने संयुक्त सैन्य अभ्यास किया।

ये स्थिति सीडीएस जनरल बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat) के उस बयान के ठीक बाद बनी है, जब उन्होनें कहा कि चीन से बने गतिरोध के मसले पर भारतीय सैन्य विकल्पों की समीक्षा करते हुए उन्हें लागू कर सकता है। हालांकि ये कदम तभी उठाया जायेगा, जब सामरिक, कूटनीतिक और राजनयिक वार्ताओं से कुछ ठोस नतीज़े (Strategic and diplomatic negotiations inconclusive) ना निकलते हो और साथ ही सभी वैकल्पिक रास्ते बंद हो जाये।

कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक अमेरिका का ये सामरिक रवैया दक्षिण-एशिया और एशिया प्रशांत के देशों को चीनी दादागिरी के प्रति रक्षा कवच का काम करेगा। साथ ही बीजिंग को कड़ा संदेश देकर कहीं ना कहीं राष्ट्रपति ट्रम्प इससे आगामी चुनावों में सियासी फायदा ले सकते हैं।

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