Happy Engineer Day 2020: एम. विश्वेश्वैरया के जन्मदिन पर देशभर में मनाया जा रहा है इंजीनियर दिवस, इस दिन से जुड़ी है ये खास बातें

आज सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वैरया का जन्मदिन है। इसे पूरे देश में अभियन्ता दिवस (Engineer Day) के तौर पर मनाया

न्यूज़ डेस्क (शौर्य यादव): आज सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वैरया का जन्मदिन है। इसे पूरे देश में अभियन्ता दिवस (Engineer Day) के तौर पर मनाया जाता है। सर विश्वेश्वैरया का जन्म मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुक में 15 सितंबर 1861 को हुआ था। कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील व‌र्क्स (Bhadravati Iron and Steel Works), मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी, मैसूर विश्वविद्यालय, महारानी कॉलेज, बैंक ऑफ मैसूर, बेंगलुरू में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और मुम्बई में प्रीमियर ऑटोमोबाइल फैक्ट्री जैसे निर्माण कार्य आज भी सर विश्वेश्वैरया की इंजीनियरिंग दक्षता के जीते जागते नमूने है। इनकी कार्यकुशलता से ब्रतानी हुकूमत भी खासा प्रभावित थी। इसी कारण इन्हें किंग जॉर्ज पंचम ने ब्रिटिश इंडियन एम्पायर के नाइट कमांडर के खिताब (The title of Knight Commander of the Indian Empire) से नव़ाजा था। इन्हें कर्नाटक की भागीरथ नाम से भी जाना जाता है।

सर विश्वेश्वरैया 12 साल के थे तब उनके पिता का देहान्त हो गया। चिकबल्लापुर से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद बीए की पढ़ाई करने वे बेंगलुरू चले गए। साल 1881 में स्नातक पूरा करने के बाद पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (Pune College of Engineering) का अध्ययन किया। साल 1912-1918 के दौरान मैसूर के महाराज ने इन्हें अपना दीवान घोषित किया। आजादी के बाद 1955 में इन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। 32 साल की उम्र में मैसूर स्टेट के चीफ इंजीनियर (Chief Engineer of Mysore State) पद की जिम्मेदारी भी सर विश्वेश्वैरया ने थामी।

जीवन में आये विपरीत हालातों से सर विश्वेश्वरैया कभी डिगे नहीं। बेंगलुरू के सेन्ट्रल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद कॉलेज फीस के भुगतान के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इससे कॉलेज फीस का खर्चा निकाला करते थे। उस दौर में जब देश में सीमेंट का उत्पादन नहीं होता था, तब बिना सीमेंट की मदद से मोर्टार तैयार कर, कृष्ण राज सागर बांध का निर्माण कार्य संपन्न करवाया। चलती ट्रेन को चैन से रोककर मज़ाक उड़ा रहे अंग्रेजों की ठीक दूरी बताते हुए रेल पटरी उखड़े होने की बात बतायी। जब अंग्रेजों ने ट्रैन से उतरकर पड़ताल की तो सर विश्वेश्वरैया का दावा सही पाया और सभी गोरे उनके कायल हो गये। अमेरिका में एक प्लान्ट के मैकेनिज़्म को समझने के लिए 75 फुट ऊपर चढ़ गये जबकि वहां मौजूदा दूसरे इंजीनियर ऊपर चढ़ने से कतराते रहे। इंजीनियरिंग के अलावा सर विश्वेश्वरैया ने बेरोजगारी, शिक्षा, बैकिंग, समाज-सुधार के क्षेत्र में भी काफी काम किया।

अगर आपका कोई दोस्त या संबंधी इंजीनियर है तो उसे शुभकामना संदेश देकर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के किये काम को याद करें।

1 Comment
  1. khas socks & knitwear says

    I could not refrain from commenting. Well written!

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