बेहतर भारत के लिए के पाँच सूत्र: चलो कर दिखाते है

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जलवायु परिवर्तन हुई कार्रवाइयों की तरह, ये वक्त वो है, जब राजनीतिक गलियारा पूरी तरह से विशुद्ध निर्णय ले। ताकि बेहतर बदलाव लाने की दिशा में देश को ले जाया जा सके।

– कैप्टन जी.एस. राठी
सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता
  1. राजनीति को अपराधीकरण से मुक्त करना: न्यायपालिका, राजकोषीय नीतियों, नौकरशाही, सैन्य, समावेशी स्वास्थ्य देखभाल, और शिक्षा को पूरी तरह से राजनीति के दागदार प्रभाव से दूर रखना।
  2. गुड गवर्नेंस को रोकने वाले एलियंस जो कि अपराधी और हत्यारें हो, जो लोकतान्त्रिक पद्धति में बाधा डालते हो उनको नायक की तरह पेश करके उनका महिमामंडन ना हो। उन एलियंस के प्रति जवाबदेह हो और तालुक्कात कायम करे, जो लोकतन्त्र के लिए सहायक हो।
  3. वो लोग जो सियासी वज़हों से हाशिये पर जी रहे है, जिनके साथ सियासी ताकतें रोज़ लिचिंग करती है। ऐसी ताकतों को संसद से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। ये लोग बिना सुरक्षा घेरे के सड़कों पर नहीं चल सकते।
  4. इन इन हत्यारों, अपराधियों और गुंडों को उन डिटेंशन सेन्टरों में बंद कर देना चाहिए, जिसे भारत के नागरिकों के लिए बनाया गया है। ये होना चाहिए। किसी भी देश के लिए सबसे बुरा समय वो होता है, जब सहिष्णुता को नकार दिया जाता है और आर्थिक ताकत बनने की क्षमता दिन-प्रतिदिन खत्म होती जा रही हो।
  5. आइये इस मॉडल में बदलाव लाये जिसमें गुड गवर्नेंस और ज़वाबदेही का मजबूत संबंध बने। ये संबंध दिल से राष्ट्र को आगे ले जायेगा। ये संबंध सामूहिक समझदारी कायम रखने का काम करेगा। ये रिश्ता सच्चाई और ज़वाबदेही लेने के साथ पाठ्यक्रमों में बदलाव और सुधारकर देश को खुशहाल और सुरक्षित रखेगा।

इसलिए राष्ट्र केन्द्रित निस्वार्थ भाव से नागरिकों के लिए और उत्तरदायी बदलाव का हिस्सा हमें बनना पड़ेगा। हमें इन समस्याओं की ओर ध्यान देने की जरूरत है और अहम मुद्दों के मूल्यांकन के साथ इसे सामूहिक दायित्व मानते हुए इसके उन्मूलन की जरूरत है। जिससे कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का सीधा फायदा समाज़ के उस नागरिक को मिले जो हाशिये पर है और मूलभूत जरूरतों से वंचित है।

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