Covid-19: उपराज्यपाल ने लिया Game changer फैसला, इलाज में आएगी तेजी

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal), उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodiya), स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) और दिल्ली के मुख्य सचिव

नई दिल्ली (गौरांग यदुवंशी):मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal), उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodiya), स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) और दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उपराज्यपाल अनिल बैजल (Anil Baijal) ने अहम फैसला लेते हुए, कोरोना वायरस (Corona Virus) के इलाज से जुड़ी प्लाज्मा एनरिचमेंट (plasma enrichment) तकनीक के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी। इस मेडिकल ट्रीटमेंट की मदद से गंभीर रूप से वायरस इनफेक्टेड लोगों की मदद की जा सकेगी।

फिलहाल के लिए प्लाज्मा एनरिचमेंट तकनीक को क्लिनिकल ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। निश्चित अवधि के बाद मूल्यांकन कर, इसे पूरी तरह लागू किया जा सकता है। उपराज्यपाल की ओर से ये फैसला वायरस इन्फेक्शन से संक्रमित मरीजों की स्थिति का जायजा लेने के बाद लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के दौरान दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव ने दावा किया कि, राजधानी में दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

गौरतलब है कि दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल (Max Saket Hospital) में Covid-19 के दो मरीजों का इस तकनीक से इलाज का पहला मामला सामने आया। जिसमें से एक मरीज के स्वास्थ्य में काफी बेहतर सुधार पाया गया। दो दिन के भीतर उसे वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया जाने की काफी संभावनाएं है।

जानिये प्लाज्मा एनरिचमेंट तकनीक के बारे में
ऐसे मरीज जो कोरोना वायरस से उबर चुके हैं, उनका इम्यून सिस्टम वायरस पैटर्न को समझते हुए एंटीबॉडी बनाता है। ये एंटीबॉडी वायरस से होने वाले अगले हमले से लड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम होते हैं। बीमारी से उबर चुके मरीज के शरीर से एंटीबॉडी निकालकर, गंभीर रूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी को डाला जाता है। नतीजन एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कर वायरस को खत्म करने लगते हैं। एंटीबॉडी की जेनेटिक मेमोरी में इंफेक्शन से जुड़ी सारी जानकारियां होती है। जिसकी मदद से वो वायरस को आसानी से खत्म करता है।

फिलहाल ये मेडिकल कवायद क्लीनिकल ट्रायल तक ही सीमित है। बेहतर नतीजे आने के बाद ही इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा। अब सबकी निगाहें इस मेडिकल प्रोसीजर की फाइनल एसेसमेंट रिपोर्ट की ओर लगी हुई है।

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