Covid-19: खाने के साथ 72 परिवारों को बांटा इन्फेक्शन

क्षिणी दिल्ली (South Delhi) के हौज़खास (Hauz Khas) और मालवीय नगर (Malviya Nagar) इलाके में वायरस इन्फेक्टेड पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय (virus infected pizza delivery boy) ने 72 परिवारों की जान

नई दिल्ली (निकुंजा राव): दक्षिणी दिल्ली (South Delhi) के हौज़खास (Hauz Khas) और मालवीय नगर (Malviya Nagar) इलाके में वायरस इन्फेक्टेड पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय (virus infected pizza delivery boy) ने 72 परिवारों की जान सांसत में डाल दी। डिलीवरी बॉय को लंबे समय से नज़ला-ज़ुकाम और खांसी की गंभीर समस्या थी। बुखार होने के बावजूद पिज़्ज़ा कंपनी ने थर्मल स्क्रीनिंग करने की बजाय उसे होम डिलीवरी के कामों में लगाए रखा। इस दौरान उसने दक्षिणी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पिज़्ज़ा डिलीवर किया।

मामले का खुलासा होने पर स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। पहली नजर में सीधी लापरवाही कंपनी की दिखी। मामले में लापरवाही का दूसरा पहलू ये है कि, अप्रैल के पहले हफ्ते के दौरान पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय ने तबीयत खराब होने के चलते कई सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटे थे। लेकिन युवक की ट्रैवल हिस्ट्री ना होने के कारण अस्पतालों ने मामले को हल्के में लिया। जिसके चलते उसका वायरस इन्फेक्शन टेस्ट नहीं हो सका। तबीयत ज्यादा खराब होने पर युवक को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उसकी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के साथ ही मामले का खुलासा हुआ।

दक्षिणी दिल्ली के जिलधिकारी के मुताबिक- युवक के साथ काम कर रहे 17 लोगों को तुरंत क्वॉरेंटाइन सेंटर में भेज दिया गया। फिलहाल इन लोगों में वायरस इन्फेक्शन के लक्षण नहीं पाए गये है। प्रशासन क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखे गए इन लोगों की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। दक्षिण दिल्ली के जिलाधिकारी बीएम मिश्रा ने डिलीवरी ब्वॉय की पिछले 30 दिनों की गतिविधियों का पता लगाने के आदेश जारी कर दिए। जिससे खुलासा हो पाएगा कि, युवक किन-किन लोगों से मिला। साथ ही उन लोगों को मेडिकल जांच के दायरे में लिया जा सकेगा। युवक ने जिन 72 परिवारों को फूड डिलीवरी दी, उन सभी परिवारों को तत्काल प्रभाव से होम क्वॉरेंटाइन कर दिया गया है।

बढ़ रहे इंफेक्शन के खतरे के बीच, ये पिज़्ज़ा कंपनी और अस्पतालों की बड़ी लापरवाही है। इस मामले के साथ ही पिज़्ज़ा कंपनी की पोल खुल जाती है, जिसमें वो वायरस के खिलाफ बड़े सुरक्षा मानकों का पालन करने का दावा करती है। मेडिकल इमरजेंसी के हालातों के दौरान सरकारी अस्पताल का ढुलमुल रवैया भी कई बड़े सवाल खड़े करता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन पिज़्ज़ा कंपनी और अस्पताल पर किस तरह की जांच कार्रवाई करेगा ये देखना दिलचस्प रहेगा।

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