China के मंसूबों की खुली पोल, Russia ने भी दिया करारा झटका

भारतीय सेना और पीपुल्स लिब्ररेशन ऑर्मी (PLA) के बीच भले ही सैन्य तैनाती कम करने की आम सहमति बन चुकी हो, लेकिन

न्यूज़ डेस्क (शौर्य यादव): भारतीय सेना और China की पीपुल्स लिब्ररेशन ऑर्मी (PLA) के बीच भले ही सैन्य तैनाती कम करने की आम सहमति बन चुकी हो, लेकिन बीजिंग के इरादे अभी भी नापाक लग रहे है। हाल ही में भारतीय उपग्रह कौटिल्य (Indian satellite Kautilya) में लगी ईएलआइएलटी यूनिट (इलैक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस यूनिट) ने तवांग (अरूणाचल) से सटे चीनी अधिकृत तिब्बत इलाके में पीएलए की गतिविधियों को तस्वीरों में कैद किया। सिक्योरिटी फोर्सेस के ऑप्रेशनल डिप्लॉयमेंट (Operational deployment of security forces) के हिसाब से ये गतिविधियां बेहद संवेदनशील है।

भारतीय सैटेलाइट कौटिल्य (ईएमआइसैट) की ईएलआइएलटी यूनिट (ELILT Unit) ने इस दौरान चीनी रडारों के सिग्नल्स (Chinese Radar Signals) और रेडियो फ्रिकवेंसी (फेस मॉड्यूलेशसन्स) को भी ट्रैस किया। बीते शनिवार को सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण भारतीय सेना की थियेटर कमांड और ऑर्मी इंटेलीजेंस (Theater Command and Army Intelligence) ने किया। ये आंकड़े ऐसे वक़्त में हासिल किये गये है, जब पूर्वी लद्दाख के मोर्चे पर पैंगांग त्सो (Pangang Tso) झील के फिंगर-4 इलाके से दोनों देशों के सेना ने बैठक कर पीछे हटने का फैसला लिया। इसके साथ ही भारतीय सैटेलाइट ने चीनी इलाके डेप्सांग में भी पीएलए की हलचलों को भी कैमरे में कैद किया। एक तरफ तो बीजिंग के हुक्मरान पीछे हटने की आम सहमति जता रहे है और दूसरी भारत से लगी सीमाओं पर तैनाती बढ़ रहे है। इस तरह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा चलाये जा रहे भारतीय सैटेलाइट कौटिल्य (ईएमआइसैट) ने चीनी मंसूबों की पोल खोल दी।

अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय (International community) में भी चीन की खुली किरकिरी हो रही है। कई बड़े देश खुलतौर पर चीन का साथ देने से कतरा रहे है। इस कड़ी में रूस ने चीन को हाल ही में करारा झटका दिया है। जिसके तहत मॉस्को (Moscow) ने बीजिंग के लिए दी जाने वाली S-400 एयर डिफेंस सिस्टम (S-400 Air Defense System) की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। ये सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक प्रणाली है। रूस के इस कदम से चीन खासा बौखलाया हुआ है। अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर मास्को के इस फैसले के कई मायने निकाले जा सकते है।

दूसरी ओर दक्षिण चीन सागर में बढ़ते चीनी दबदबे के बीच वियतनाम की दो अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को चीन करोड़ो डॉलर का भुगतान करेगा। जिसके एवज़ में ये कंपनियां इस इलाके में खनन, शोध और उत्पादन से जुड़े कामों को स्थगित कर देगी। बीजिंग इस इलाके में एकछत्र दखल चाहता है। इसीलिए उसने दोनों वियतनामी कंपनियों (Vietnamese companies) के मुआवज़े की पेशकश की है। कई दिनों से पीएलए की नेवल यूनिट (PLA Naval Unit) इन कंपनियों के ऑप्रेशंस में दखल दे रही थी। जिससे पेट्रोलियम और गैस के उत्पादन और वितरण पर बुरी तरह प्रभाव पड़ रहा था। चीनी दबाव और मुआवज़े (Chinese pressure and compensation) की पेशकश के सामने कंपनियों को मजबूरन घुटने टेकने पड़ रहे है।

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