देश बांट रहे हैं अरविंद केजरीवाल?

दिल्ली सरकार की ओर से देश की अखंडता और संप्रभुता भंग करने वाला विज्ञापन सामने आया। मामले पर दिल्ली सरकार ने

न्यूज़ डेस्क (तिलोत्तमा सेन): दिल्ली सरकार (Delhi government) की ओर से देश की अखंडता और संप्रभुता (Integrity and sovereignty) भंग करने वाला विज्ञापन सामने आया। मामले पर दिल्ली सरकार ने अधिकारी को निलंबित करके पल्ला झाड़ लिया। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार की ओर से सिविल डिफेंस कोर (Civil defense corps) में स्वयंसेवकों (volunteers) की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था।

जिसमें सिक्किम को नेपाल और भूटान (Nepal and Bhutan) की तरह भारत से अलग बताया गया। जैसे ही विज्ञापन की कॉपी वायरल हुई सिक्किम के मुख्य सचिव (Chief Secretary of Sikkim) ने केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर मामले को आपत्तिजनक (Offensive) बताया। जैसे सिक्किम मुख्य सचिव की आधिकारिक चिट्ठी (Official letter) की बात दिल्ली दरबार के अधिकारियों तक पहुँची उनके हाथ-पांव फूलने लगे। मामले पर खुद अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) ने सफाई देते हुए कहा- सिक्किम भारत का अभिन्न अंग है। ऐसी गलतियां माफी के लायक नहीं है। जारी किया गया विज्ञापन वापस ले लिया गया है। संबंधित अधिकारी के खिल़ाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) करते हुए निलंबित (suspended) कर दिया गया है।

मामले की संवेदनशीलता देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल (Lieutenant Governor of Delhi Anil Baijal) ने ट्विट कर लिखा कि- नागरिक सुरक्षा निदेशालय (मुख्यालय) के एक वरिष्ठ अधिकारी को सिक्किम की तुलना पड़ोसी देशों से करने वाले विज्ञापन के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारी ने सिक्किम पर गलत संदर्भ देकर देश की क्षेत्रीय अखंडता (territorial integrity) का अपमान किया है।

मामला बेहद गंभीर है। सिक्किम भारतीय संघ (Union of india) का अभिन्न है। ऐसे में दिल्ली सरकार का अधिकारी इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकता है। अरविंद केजरीवाल भले ही इसे अधिकारी गलती ठहरा रहे हो। आमतौर विज्ञापनों में गलती होती है तो, वो सिर्फ टाइपिंग से जुड़ी हुई हो सकती है। यहाँ पर जिस तरह की गलती हुई वो पूरी तरह तथ्यात्मक त्रुटि (Factual error) है। यानि कि विज्ञापन तैयार करते हुए अधिकारी को इस बात की समझ नहीं थी कि, सिक्किम भारत का हिस्सा है या नहीं। दूसरी ओर अगर सिक्किम के मुख्य सचिव अगर चिट्ठी लिखकर आपत्ति दर्ज नहीं करवाते तो बात आई और गयी हो जाती। ऐसे में अधिकारी की योग्यता पर भी प्रश्न चिन्ह लगते है, क्या उसे इतनी साधारण सी भी बात का भान नहीं था। अगर उसे इतनी साधारण सी बात का भी ज्ञान नहीं था तो उसने किस तरह सिविल डिफेंस निदेशालय (Directorate of civil defense) में नौकरी हासिल कर ली? दूसरी ओर बड़े सवालिया निशान केजरीवाल सरकार पर भी लगते है, क्योंकि विज्ञापन उन्हीं के नाम पर जारी किया गया था।

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