Review: Demonetization पर आधारित Anurag Kashyap की सस्पेंस ड्रामा हुई रिलीज़

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एंटरटेनमेंट डेस्क (शिवानी त्यागी): अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) बॉलीवुड के जाने माने निर्देशकों में से एक है जो अपनी फिल्मों को लेकर सुर्खियों में ले कर बने ही रहते है। अनुराग कश्यप ऐसी फिल्में बनाते है जो की बहुत ही संवेदनशील विषय पर होती है। ऐसी ही एक फिल्म लेकर या कहे की वेब सीरीज लेकर एक बार फिर अनुराग कश्यप आ गए है।

राजनीति हिंदी सिनेमा का पसंदीदा विषय रहा है, कई फिल्मकारों ने राजनीती के ऊपर फिल्में बनाई है। अनुराग कश्यप ने इस बार पिछले कुछ सालों में हुई सबसे अहम सियासी घटनाओं में से एक नोटबंदी (demonetization) को अपनी फ़िल्म ‘चोक्ड- पैसा बोलता है’ (Choked – Paisa Bolta hai) में दिखाया है। ‘चोक्ड’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म की बात की जाये तो यह राइटिंग और परफॉर्मेंसेज़ की वजह से दर्शक को बांधे रखती है।

कहानी:
अगर बात करे फिल्म की स्टोरी की तो शुरुआत होती है कुछ इस तरह से कि मुंबई में रहने वाला एक मिडिल क्लास परिवार है। बीवी सरिता बैंक में काम करती है, पति सुशांत बेरोज़गार है, दोनों का एक बच्चा है। सुशांत नौकरी छोड़ चुका है, दोस्त के साथ इंश्योरेंस पॉलिसी (insurance policy) बेचने का काम करता है। आमदनी का कोई स्थायी ज़रिया नहीं है। घर चलाने की ज़िम्मेदारी सरिता पर ही है, इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते हैं।

सुशांत म्यूज़िक इंडस्ट्री में करियर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरिता कभी गाना गाती थी मगर अब गाने की बात आते ही उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। इसके पीछे एक घटना है जो कहानी में सस्पेंस की छौंक लगाने में मदद करती है। इसी घटना के फ़्लैश बैक बीच-बीच में आते रहते हैं। कहानी में पहला ट्विस्ट तब आता है जब एक रात  किचन की नाली जाम हो जाती है। जाली खोलने पर गंदे पानी के साथ प्लास्टिक में लिपटी पांच सौ और हज़ार के नोटों की गड्डियां बाहर आने लगती हैं।

सरिता इसे मां लक्ष्मी की कृपा मानकर रख लेती है। यह सिलसिला हर रात चलता है। सरिता किसी के कोई ज़िक्र नहीं करती और इन पैसों को अपने पति का कर्ज़ चुकाने में ख़र्च करती है। अचानक नोटबंदी का एलान हो जाता है और पांच सौ और हज़ार के पुराने नोट बंद हो जाते है। इसके बाद सरिता की ज़िंदगी कैसे बदलती है? वो पैसों का क्या करती है? नाली में नोटों की गड्डियां कौन डालता है? कुछ ऐसे ही सवालो के साथ कहानी आगे बढ़ती है और आपका मनोरंज करती है।

एक्टिंग:
एक्टिंग के बारे में बात करें तो संयमी खेर सरिता का किरदार निभाती नजर आ रही है। इस किरदार को संयमी ने बखूबी निभाया है और वो बिलुल एक मिडिल क्लास हाउसवाइफ की तरह दिख रही है। उन्होंने अपने किरदार को बिल्कुल मन से जिया है। सुशांत के किरदार में मलयाली एक्टर रोशन मैथ्यू (Roshan Mathew) का यह हिंदी  डेब्यू है। सुशांत का अभिनय भी काफी अच्छा है। अपने काम को लेकर कहीं भी असमंजस में नहीं दिखाई पड़ते है। सहयोगी कलाकारों की बात की जाए तो अमृता सुभाष और राजश्री देशपांडे ने भी अपने अपने रोल के साथ इन्साफ किया है।

निहित भावे ने इसको लिखा है। उन्होंने इस तरह से कहानी को बुना है कि फिल्म पूरी तरह से मिडिल क्लास फैमिली को दर्शाती है। फिल्म में पूरी तरह से दिखाया गया है कि कैसे अचानक पुराने नोटों के बंद होने से क्या और कितना असर हुआ और नए नोटों के साथ लोगों की प्रतिक्रिया क्या रही। इसमें अच्छे से दिखाया गया है की जब नोटबंदी की गयी तब लोगों का लाइन में लगना, बैंक के कर्मचारियों पर दबाव डालना और जल्दी जल्दी पुराने नोटों को बदलने की मारामारी। लेखक ने कहानी को बहुत ही बारीकी से पिरोया है।

‘चोक्ड-पैसा बोलता है’ एक मिडिल क्लास पर आधारित एक फिल्म है जिसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल रखा गया है क्योंकि ये अनुराग कश्यप की फिल्म है तो लोगों को लगता ही होगा कि गाली तो होगी ही पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह एक देखने लायक फिल्म है। अगर आप घर बैठे बैठे बोर हो रहे है तो नेटफ्लिक्स (Netflix) पर ये अच्छा मनोरंजन है।

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