America करने जा रहा है China का सैन्य घेराव, उठाया ये बड़ा कदम

चीन के विस्तारवादी रवैये (China’s expansionary attitude) और आक्रामक बाज़ार नीतियों से तकरीबन पूरा विश्व परेशान

नई दिल्ली (शौर्य यादव): चीन के विस्तारवादी रवैये (China’s expansionary attitude) और आक्रामक बाज़ार नीतियों से तकरीबन पूरा विश्व परेशान हो चुका है। कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश (Southeast Asian Countries) चीन की हरकतों से आज़िज आ चुके है। ब्रुनेई, वियतनाम, ताइवान, फिलीपींस, जापान, हांगकांग, इंडोनेशिया, मलयेशिया और भारत। बीजिंग के बाहरी हस्तक्षेप के कारण इन देशों का गुस्सा अपने चरम पर है। ऐसे में सैन्य शक्ति संतुलन (Balance of Military power) बनाने के लिए व्हाइट हाउस की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है।

वाशिंगटन के नीति-नियन्ताओं ने अहम फैसला लेते हुए, जर्मनी सहित यूरोप के कई देशों से अमेरिकी सैनिकों की तैनाती (Deployment of american troops) में भारी कमी करने जा रहे है। अब अमेरिकी सैनिकों की तैनाती दक्षिण चीन सागर और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के चीन से सटे सीमाई इलाकों में होगी। चीन से उभर रहे खतरे में मद्देनज़र ये बड़ा फैसला अमेरिकी प्रशासन (US Administration) की ओर से लिया गया है। यूरोपीय देशों से अमेरिकी सैन्य बलों में भारी कमी करने के फैसले के कारण राष्ट्रपति ट्रम्प (US Administration) को भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

ब्रसेल्स के मंच (Brussels Forum) पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि- हम अपनी तैयारियां पीएलए के मद्देनज़र पुख़्ता करना चाहते है। किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सैन्य तैनाती दक्षिण-पूर्वी एशिया में सुनिश्चित की जा रही है। इस इलाके में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party) का रवैया काफी आक्रामक स्तर तक पहुँच चुका है। संतुलन और शांति बहाल रखने के लिए अमेरिकी हस्तक्षेप जरूरी है। यूरोपीय ताकतों को चीन की इन हरकतों की समीक्षा करते हुए, किसी ठोक फैसले पर पहुँचना चाहिए। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सैन्य बलों के बीच हुई मुठभेड़ को लेकर आपस में बातचीत करेगा।

फिलहाल भारत ने चीन से सटी सभी सीमाओं सैन्य बलों की संख्या को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही Heavy Artillary, Front Line Battle Air Craft की भी तैनाती कर दी है। तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को मामले में हस्तक्षेप कर तनाव कम करना चाहिए। साथ ही सुरक्षा परिषद (security Council) में चीन की सदस्यता की भी समीक्षा होनी चाहिए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More