100 years of ASSOCHAM, AGM 2019: देश हित में लिए गए फैसलों से कभी-कभी अंसतोष फैलता है- पीएम मोदी

देशभर में सीएए के विरुद्ध बनते माहौल के बीच आज पीएम मोदी ने एसोचैम (एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) के कार्यक्रम में शिरकत की। मौका था एसोचैम के 100 वर्ष पूरा होने का। पूरे कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कई पहलुओं पर बात की। उन्होंने सबसे पहले एसोचैम को 100 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई दी। गौरतलब है कि एसोचैम भारत के वाणिज्यिक गतिविधियों से जुड़े संघों की प्रतिनिधि संस्था है। इसकी स्थापना साल 1920 में हुई थी। हालिया वक़्त में भारत की एक लाख से ज़्यादा कंपनियां इसकी मेम्बर हैं। कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने अर्थव्यवस्था, वाणिज्य, कारोबार, और औद्योगिक विकास से जुड़े पहलुओं पर अपने वक़्तव्य दिये। कार्यक्रम में उनके दिए भाषण में जो सबसे ज्यादा दिलचस्प बात रही वह सीएए पर उनका बयान था।

कार्यक्रम में नागरिकता संशोधन अधिनियम पर पीएम मोदी ने रखा अपना पक्ष
देशहित में काम करने के लिए काफी गुस्सा और प्रतिरोध झेलना पड़ता है, कई लोगों की नाराजगी, हताशा और असंतोष झेलना पड़ता है। इसके साथ ही आरोपो-प्रत्योरोपों के लंबे सिलसिले से भी गुजरना पड़ता है। लेकिन ऐसा इसलिए मुमकिन हो पाता है क्योंकि देश के लिए करना है।

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी के अभिभाषण के मुख्य बिंदु
∙ Ease of Doing Business कहने में चार शब्द लगते हैं लेकिन इसकी रैंकिंग में बदलाव तब होता है जब दिन-रात मेहनत की जाती है, जमीनी स्तर पर जाकर नीतियों में, नियमों में बदलाव होता है। आज भारत दुनिया के उन TOP 10 देशों में शामिल है, जिसने इज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में पिछले 3 वर्षों में लगातार सबसे अच्छा सुधार किया है।
∙ अर्थव्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए, उद्योग जगत के लिए किये जा रहे हर फैसले पर सवाल उठाना ही अब कुछ लोगों का राष्ट्रीय कर्तव्य बन गया है। हमारी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से अब 13 बैंक मुनाफे में वापस आ चुके हैं। 6 बैंक PCA से भी बाहर निकल चुके हैं। हमने बैंकों का एकीकरण भी तेज किया है। बैंक अब अपना देशव्यापी नेटवर्क बढ़ा रहे हैं और अपनी global पहुंच कायम करने की ओर अग्रसर हैं। आपने अपने सेन्टेनरी सेलीब्रेशन की जो थीम रखी है, वो देश के, देशवासियों के लक्ष्यों और सपनों के साथ जुड़ी है।


5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य जब मैंने सार्वजनिक रूप से कहा तो मुझे पता था कि सुगबुगाहट शुरु हो जाएगी, ऐसा भी कहा जाएगा कि भारत ऐसा नहीं कर सकता है। लेकिन आजकल अर्थव्यवस्था को गति देने वाले सभी समूह 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को लेकर चर्चा तो करते हैं। इसी सकारात्मकता के आधार पर हम 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की तरफ बढ़ने वाले हैं। 
∙ आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश, इसे ताकत देगा। देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा। आज हम ये कह सकते हैं कि देश की बैंकिंग प्रणाली की नींव अब इतनी पारदर्शी हो रही है कि 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को ऊर्जा दे सकते हैं। आज हम दुनिया के टॉप 10 FDI डेस्टीनेशन्स में से एक हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में FDI आने की गति बढ़ी है।

∙ हमने अर्थव्यवस्था के ज्यादातर आयामों को Formal व्यवस्था में लाने का प्रयास किया है। इसके साथ ही हम अर्थव्यवस्था को आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए Modernize और Speed-Up करने की दिशा में भी आगे बढ़े हैं। टैक्स सिस्टम में Transparency, Efficiency और Accountability लाने के लिए हम Faceless Tax Administration की ओर बढ़ रहे हैं। Companies Act में सैकड़ों ऐसे प्रावधान थे, जिसमें छोटी-छोटी गलतियों के लिए क्रिमिनल एक्शन की बात थी।

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